राजस्थान में 36 साल का सबसे खतरनाक मई: रोज 2 मौतें, क्योंकि 7 के बजाय 21 दिन जानलेवा लू, क्या जून भी ऐसे ही तपेगा?

रह-रह आंखों में चुभती है पथ की निर्जन दोपहरी

आगे और बढे़ं तो शायद दृश्य सुहाने आएंगे।

इस बार मई का पूरा महीना दुष्यंत कुमार की कविता की पहली पंक्ति की तरह रहा। दोपहरी निर्जन भी थी और जानलेवा भी। 31 दिन में 67 मौतें, यानी हर दिन 2 की जान गई। वजह- 7 के बजाय 21 दिन हीटवेव। इनमें भी 11 दिन सीवियर हीटवेट थी। यानी जानलेवा लू। 36 साल में पहली बार मई का महीना इतना तपा। तापमान 50 डिग्री काे पार कर गया। आग उगलती सड़कों को ठंडा करने के लिए पानी का छिड़काव करना पड़ा।

अब आते हैं कविता की दूसरी लाइन पर

आगे और बढे़ं तो शायद दृश्य सुहाने आएंगे…

ये सवाल हर किसी के जेहन में है- क्या जून भी इसी तरह तपेगा? मानसून कैसा रहेगा?

क्या हुआ : एक के बजाय तीन सप्ताह तक हीटवेव

आमतौर पर मई में औसतन एक सप्ताह ही हीटवेव का दौर होता है, लेकिन इस साल दो स्पेल (दौर) बने। पहला स्पेल 7 मई से 10 मई तक रहा। इस दौरान पारा लगातार बढ़ता रहा। इसके बाद दूसरा स्पेल 16 मई से 31 मई तक रहा। इसमें 21 मई से भीषण लू चली। मई के कुल 31 दिनों में से 21 दिन लू और भीषण लू का दौर रहने से पारा काबू से बाहर हो गया। इस दौरान राजस्थान के अलग-अलग जिलों में पारा लगातार 47 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा बना रहा।

इस प्रकार मई में प्रदेश में सामान्य से तीन गुना अधिक हीटवेव चली, जिसके कारण यह स्थिति बनी।

क्यों हुआ : एंटी साइक्लोन के 'ढक्कन' से बढ़ी हीटवेव

हीटवेव बनने के लिए तकनीकी रूप से जमीन की सतह से 2 से 10 किलोमीटर ऊपर वातावरण में हवा का पैटर्न मुख्य भूमिका निभाता है। इस ऊंचाई पर हवा का पैटर्न एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन (प्रति चक्रवाती तंत्र) विकसित होने से उस क्षेत्र में तापमान सामान्य से 3 से 7 डिग्री बढ़ जाता है। यह एंटी साइक्लोन दक्षिणी-पूर्वी राजस्थान, पाकिस्तान, अरब सागरीय क्षेत्र, ईरान के पूरे क्षेत्र में बना था। इससे हवा में नमी की कमी हो जाने से बारिश नहीं होती और शुष्क हवा चलने से तापमान में बढ़ोतरी होती है।

आसमान साफ रहने, बादल बनने से हवा का रुख ऊपर से सतह की ओर चलने लगता है, जिससे सूरज की गर्मी वायुमंडल की निचली परत और सतह के बीच कैद होकर रह जाती है। तापमान बढ़ जाता है। एंटी साइक्लोन एक तरह से वातावरण के लिए 'ढक्कन' का काम करता है। मौसम विभाग के मुताबिक, जब पारा 45 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो जाए तब लू यानी हीटवेव चलती है।

जब पारा 47 डिग्री या उसे ज्यादा पर पहुंच जाए, तब मौसम विभाग इसे भीषण लू या सीवियर हीटवेव घोषित करता है।

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