बिहार के कई जिलों में भारी बारिश हो रही है। पिछले 24 घंटे में 12 जिलों में 21 लोगों की मौत बिजली गिरने से हुई हैं। राज्य की नदियां उफान पर हैं। भागलपुर में गंगा और कोसी से कटाव हो रहा है। कई घर नदी में समा चुके हैं। कुछ लोग घर छोड़ने के लिए मजबूर हो गए हैं। उधर, उत्तर प्रदेश में नेपाल से लगे जिलों बाढ़ जैसे हालात हैं। पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, महराजगंज के करीब 800 गांव लगातार तीसरे दिन भी बाढ़ की चपेट में हैं। शाहजहांपुर में दिल्ली-लखनऊ हाईवे लगातार दूसरे दिन बंद है। बलरामपुर में प्राइमरी स्कूल में 3 फीट तक पानी भरा है।
UP-बिहार के अलावा पूरे देश में ही तेज बारिश का दौर चल रहा है। मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा, जम्मू, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मुंबई में IMD ने बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इससे सड़क, रेल और एयर ट्रैफिक सर्विसेस प्रभावित हो सकती हैं। दिल्ली के भी कुछ इलाकों में शुक्रवार देर रात शनिवार सुबह तेज बारिश देखने को मिली। यहां आज भी बारिश होने के आसार हैं।
देश में तेज बारिश का असर...
बिहार: CM नीतीश बोले- सावधानी बरतें, घरों में सुरक्षित रहें
बिहार के भागलपुर में कोसी उफान पर है। नदी का कटाव तेज हो गया है। पिछले 24 घंटे में आकाशीय बिजली से मधुबनी में 6, औरंगाबाद में 4, पटना में 2 मौत हुई है। वहीं, रोहतास, भोजपुर, जहानाबाद, सारण, कैमूर, गोपालगंज, लखीसराय, मधेपुरा और सुपौल में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है CM नीतीश कुमार ने मृतक के परिजनों को चार-चार लाख रुपए मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। CM ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम में पूरी सतर्कता बरतें। वज्रपात से बचाव के लिए आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से समय-समय पर जारी किए गए सुझावों का पालन करें। घरों में रहें और सुरक्षित रहें।
उत्तर प्रदेश: दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर अभी भी 3 फीट तक पानी
दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर शाहजहांपुर में करीब 2 से 3 फीट पानी भरा हुआ है। हाईवे के एक हिस्से को लगातार दूसरे बंद कर दिया गया है। शुक्रवार को 15-20 जिलों में 5 मिलीमीटर बारिश हुई। सबसे ज्यादा 38 मिलीमीटर लखीमपुर खीरी में बारिश हुई। सबसे कम तापमान बरेली में 22.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। गोरखपुर में राप्ती नदी के किनारे बहरामपुर में इमारातों की एक-एक मंजिल डूब गई है। यहां जो कालोनियां नदी से दूर हैं, उनमें भी 3-4 फीट तक पानी भर गया है। यहां नाव भी चल रही हैं। प्रशासन ने कहा है कि राप्ती से सटा होने के चलते यह क्षेत्र हर साल डूबता है।
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