सुप्रीम कोर्ट : में समलेटी बम धमाका मामले की सुनवाई पूरी हो गई है और अब फैसला सुरक्षित रख लिया गया है। यह मामला 22 मई 1996 का है, जब राजस्थान रोडवेज की एक बस में हुए विस्फोट में 14 यात्रियों की मौत हो गई थी और 37 लोग घायल हो गए थे।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और मुख्य पक्षकार
सुप्रीम कोर्ट की तीन-न्यायाधीशों की पीठ (न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति संदीप मेहता) इस मामले की सुनवाई कर रही है।
राजस्थान सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट राजा ठाकरे और अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) शिव मंगल शर्मा ने पैरवी की। ठाकरे, जो हाल ही में भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल बने हैं, ने राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए निचली अदालत के अभियुक्तों को दोषी ठहराने के फैसले को बरकरार रखने की अपील की।
वहीं, आरोपियों की ओर से सीनियर एडवोकेट कामिनी जायसवाल ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को चुनौती देते हुए न्यायिक प्रक्रिया में खामियों की ओर ध्यान दिलाया।
क्या है 1996 का समलेटी बम धमाका मामला?
22 मई 1996 को राजस्थान रोडवेज की एक बस आगरा से बीकानेर जा रही थी। दौसा जिले के महवा से निकलने के कुछ ही समय बाद समलेटी गांव के पास इसमें धमाका हुआ, जिसमें 14 यात्रियों की मौत हो गई और 37 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
इस मामले में 12 सितंबर 1996 को आरोप पत्र दायर किया गया जिसमें जावेद खान, डॉ. अब्दुल हमीद, रियाज अहमद शेख और चंद्र प्रकाश अग्रवाल सहित अन्य लोगों को अभियुक्त बनाया गया।
अदालती कार्यवाही और सजा
15 जुलाई 2002 को एक निचली अदालत ने डॉ. अब्दुल हमीद को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई। अन्य आरोपियों को आजीवन कारावास और भारी जुर्माने की सजा सुनाई गई। वहीं कुछ आरोपियों को प्रत्यक्ष साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।
हाईकोर्ट ने सजा बदली
निचली अदालत के फैसले के 17 साल बाद, 22 जुलाई 2019 को राजस्थान हाई कोर्ट ने डॉ. अब्दुल हमीद की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। इसके बाद राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की और आरोपियों को सुनाई गई निचली अदालत की सजा को बरकरार रखने की मांग की। वहीं, डॉ. अब्दुल हमीद और अन्य दोषियों ने भी अपनी सजा को चुनौती दी थी।
अब सुप्रीम कोर्ट में अंतिम फैसला होने जा रहा है, जो इस 39 साल पुराने मामले का निपटारा करेगा।
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