कोटा, राजस्थान : इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के लिए विश्व प्रसिद्ध कोटा कोचिंग सिस्टम संक्रमण के दौर से गुजर रहा है। तेजी से बदलते समय के साथ इस शिक्षा नगरी को कई नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कोटा की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए इसे अपनी आबो-हवा सुधारनी होगी और अभिभावकों व विद्यार्थियों के विश्वास को फिर से जीतना होगा।
कोटा कोचिंग की शिक्षण-पद्धति पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन शहर के माहौल को सुधारने की जरूरत है। सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासनहीनता, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और अनुचित गतिविधियों के कारण कोटा आने वाले विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की चिंता बढ़ती जा रही है। हाल ही में चैंपियंस ट्रॉफी जीतने के बाद जवाहर नगर में हुई तोड़फोड़ और हंगामे जैसी घटनाएं कोटा की शैक्षणिक प्रतिष्ठा के लिए खतरा हैं।
कोटा में आईआईटी और नीट की तैयारी करने वाले लाखों विद्यार्थी हर साल अपने सपनों को साकार करने आते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि 23 प्रतिष्ठित आईआईटी में केवल 17,000 सीटें हैं, जबकि 12 लाख से अधिक विद्यार्थी इन सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। इसी तरह, मेडिकल संस्थानों में एमबीबीएस की 60,000 गवर्नमेंट सीटों के लिए 24 लाख से अधिक छात्र परीक्षा देते हैं। इसका मतलब यह है कि सफल होने की संभावना बहुत कम है—आईआईटी में 1.4% और मेडिकल में 2.5%।
विद्यार्थियों को मानसिक रूप से तैयार करना जरूरी है कि अगर वे आईआईटी या मेडिकल में चयनित नहीं होते, तो उनके पास और भी कई करियर विकल्प मौजूद हैं। कानून, पत्रकारिता, पर्यावरण, स्किल-डेवलपमेंट, प्रबंधन शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में भी उज्ज्वल भविष्य है। कोटा को इन क्षेत्रों में भी अवसरों का विस्तार करना होगा, ताकि विद्यार्थी असफलता से हताश न हों और नए विकल्पों की तलाश कर सकें।
कोटा कोचिंग सिस्टम को अपने गौरव को बनाए रखने के लिए अपनी आबो-हवा सुधारने, विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित माहौल बनाने और करियर विकल्पों को विस्तार देने पर ध्यान देना होगा। यही प्रयास कोटा को फिर से शैक्षणिक नगरी के रूप में विश्व स्तर पर पहचान दिलाएगा।
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