लोकसभा : में बुधवार (2 अप्रैल) को वक्फ संशोधन विधेयक, 2024 को फिर से पेश किया गया। संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में भेजे जाने के बाद इसे नए सिरे से लाया गया है। इस विधेयक पर सदन में बहस के बाद मतदान होगा। ऐसे में यह जानना अहम है कि संसद में इस वक्त सत्तापक्ष और विपक्ष के पास कितना संख्या बल है, कौन सा राजनीतिक दल किस ओर है और भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए इसे लोकसभा और राज्यसभा में किस तरह पास करा सकता है। आइए जानते हैं इस विधेयक के समर्थन और विरोध से जुड़े समीकरण।
पक्ष | विपक्ष | रुख साफ नहीं |
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भाजपा | कांग्रेस | एसकेएम |
टीडीपी | सपा | शिअद |
जदयू | टीएमसी | जेडपीएम |
शिवसेना | डीएमके | |
लोजपा (रामविलास) | शिवसेना (यूबीटी) | |
रालोद | एनसीपी (एससीपी) | |
जनसेना पार्टी | वाईएसआरसीपी | |
जेडीएस | माकपा | |
यूपीपीएल | राजद | |
एजीपी | झामुमो | |
अपना दल | आईयूएमएल | |
आजसू | आप | |
हम | भाकपा (माले) | |
एनसीपी | नेकां | |
भाकपा | ||
वीसीके | ||
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) | ||
वीपीपी | ||
एआईएमआईएम | ||
एमडीएमके | ||
बीएपी | ||
आरएसपी | ||
रालोप | ||
केरल कांग्रेस | ||
निर्दलीय |
543 सदस्यीय लोकसभा में इस वक्त 542 सांसद हैं, क्योंकि पश्चिम बंगाल की बशीरहाट सीट रिक्त है। विधेयक को पास कराने के लिए 272 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी, जबकि सत्तारूढ़ एनडीए के पास 272 से ज्यादा सांसद हैं।
एनडीए का गणित: भाजपा के 240 सांसद हैं, और विधेयक को पास कराने के लिए 32 और सांसदों की जरूरत होगी। टीडीपी (16 सांसद), जदयू (12 सांसद), लोजपा (5 सांसद), शिवसेना (शिंदे गुट), रालोद, जेडीएस, जनसेना, अजित पवार की एनसीपी और पूर्वोत्तर के कई दल समर्थन कर सकते हैं।
विपक्ष की स्थिति: कांग्रेस (99 सांसद), सपा (37 सांसद), टीएमसी, डीएमके, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (एससीपी), वाईएसआरसीपी, माकपा, राजद, आप, झामुमो, आईयूएमएल, नेकां, भाकपा, वीसीके, आजाद समाज पार्टी, एआईएमआईएम जैसे दल विरोध कर रहे हैं।
राज्यसभा में कुल 236 सांसद हैं, जबकि 9 सीटें खाली हैं। 119 सांसदों के समर्थन से विधेयक पास हो सकता है।
एनडीए का गणित: भाजपा (98 सांसद), जदयू, टीडीपी, एनसीपी, आरपीआई (ए), असम गण परिषद, यूपीपीएल, हम, आजसू, निर्दलीय सांसदों का समर्थन संभावित है।
विपक्ष की स्थिति: कांग्रेस (27 सांसद), टीएमसी, आप, डीएमके, बीजद, वाईएसआरसीपी, एआईएडीएमके, शिवसेना (यूबीटी) और वामपंथी दल विधेयक के विरोध में हैं।
अस्पष्ट स्थिति: बीआरएस (4 सांसद), बसपा (1 सांसद), एमएनएफ (1 सांसद) और 6 नामित सांसदों का रुख अभी स्पष्ट नहीं है।
विधेयक में वक्फ संपत्तियों की पारदर्शिता बढ़ाने, विवाद निपटाने और गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में पदेन सदस्य के रूप में शामिल करने का प्रावधान है। एनडीए सहयोगियों की मांग पर सरकार ने संशोधन किए हैं, जिनमें वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण, संपत्ति विवाद निपटारे के अधिकार राज्य सरकार को देने और धार्मिक संपत्तियों की मौजूदा स्थिति बनाए रखने की बात शामिल है।
विधेयक के पक्ष में एनडीए का संख्याबल मजबूत दिख रहा है, लेकिन राज्यसभा में कुछ दलों का रुख महत्वपूर्ण होगा। विपक्ष विधेयक का विरोध कर रहा है, लेकिन सरकार के पास इसे पारित कराने के पर्याप्त साधन मौजूद हैं।
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