अल्पसंख्यक : मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को वक्फ संशोधन विधेयक 2024 लोकसभा में पेश किया। इस विधेयक के जरिए वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को कानूनी दायरे में लाने और विवादों को सुलझाने का प्रस्ताव है। इस पर सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हो रही है।
विधेयक पर सत्ता पक्ष (NDA) और विपक्षी गठबंधन (INDIA) के बीच टकराव देखा जा रहा है।
सत्ता पक्ष (NDA) का समर्थन:
भाजपा और एनडीए के घटक दल इस विधेयक को न्यायपूर्ण और पारदर्शी बता रहे हैं।
सरकार का कहना है कि इससे वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का सही प्रबंधन और कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
अवैध अतिक्रमण और संपत्ति के दुरुपयोग को रोकने के लिए इसे महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है।
विपक्ष (INDIA गठबंधन) का विरोध:
विपक्षी पार्टियों ने इस विधेयक को अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला बताया।
कांग्रेस, टीएमसी, AAP सहित विपक्षी दलों का कहना है कि यह वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता को प्रभावित कर सकता है।
विपक्ष सरकार पर धार्मिक ध्रुवीकरण का आरोप लगा रहा है।
वक्फ संपत्तियों की पारदर्शिता:
सरकार संपत्तियों का डिजिटलीकरण कर गैर-कानूनी कब्जों पर रोक लगाएगी।
2️⃣ विवाद निपटान प्रक्रिया:
संपत्तियों से जुड़े विवादों को हल करने के लिए नए नियम बनाए जाएंगे।
3️⃣ वक्फ बोर्ड की जवाबदेही:
बोर्ड को वित्तीय पारदर्शिता और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के लिए कड़े दिशानिर्देश दिए जाएंगे।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों की रक्षा और कुशल प्रबंधन सुनिश्चित करना है।
विपक्षी दलों ने जोरदार विरोध करते हुए कहा कि यह अल्पसंख्यक अधिकारों का हनन है।
सदन में विधेयक पर चर्चा के लिए 8 घंटे का समय तय किया गया है।
विधेयक पर चर्चा के बाद वोटिंग होगी।
अगर यह लोकसभा में पारित होता है, तो इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इसे कानून का रूप दिया जाएगा।
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