लोकसभा : में वक्फ संशोधन बिल-2025 पास होने के बाद, इस बिल को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस पर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह बिल सिर्फ अल्पसंख्यकों को निशाने पर लेने की एक साजिश है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस तरह के विवादास्पद कानूनों के जरिए असली मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहती है, जिसमें महंगाई, बेरोजगारी, आर्थिक संकट और शेयर बाजार में गिरावट शामिल हैं।
वक्फ संशोधन बिल-2025 गुरुवार को लोकसभा में पारित कर दिया गया। अब इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा। इस बिल के जरिए वक्फ से जुड़ी संपत्तियों के नियमों में बदलाव किए गए हैं, जिससे कई वर्गों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि:
“महंगाई, बेरोजगारी, शेयर बाजार में गिरावट और रुपए के अवमूल्यन जैसे गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए सरकार बार-बार अल्पसंख्यकों को निशाने पर लेने वाले कानून बना रही है।”
गहलोत ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बिल अनावश्यक है और इसे लाने की कोई जरूरत नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार समाज में भय और अस्थिरता पैदा करने के लिए इस तरह के कानून बना रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह बिल बहुसंख्यक समाज को गुमराह करने और अल्पसंख्यक समाज में असुरक्षा का माहौल पैदा करने का एक तरीका है।
गहलोत ने आगे कहा कि केंद्र सरकार का असली उद्देश्य हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच तनाव बढ़ाना है।
उन्होंने तर्क दिया कि जब देश में महंगाई चरम पर है, बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है और आर्थिक संकट गहराता जा रहा है, तब सरकार इन मुद्दों को हल करने के बजाय धार्मिक ध्रुवीकरण करने वाले कानून बना रही है।
अशोक गहलोत ने अपने बयान में CAA (नागरिकता संशोधन कानून) का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि:
"CAA कानून 2020 में पास किया गया था, लेकिन इसके नियम 2024 में बनाए गए। सरकार ने इसे बार-बार उछालकर राजनीतिक लाभ लिया और देश में तनाव पैदा किया।"
गहलोत ने इसे सियासी रणनीति का हिस्सा बताया और कहा कि इस तरह के कानूनों का मकसद जनता को बांटना और असली समस्याओं से ध्यान हटाना है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि वक्फ संशोधन बिल-2025 को लेकर देश में बहस और विरोध देखने को मिल सकता है।
गहलोत के बयान के बाद विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर सरकार को घेर सकते हैं। वहीं, केंद्र सरकार इस बिल को सुधारात्मक कदम बता रही है।
क्या वाकई में यह बिल अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए लाया गया है?
या फिर यह संपत्तियों के सही प्रबंधन के लिए आवश्यक कानून है?
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