दौसा अस्पताल में एक दूसरे से भिड़ गए डॉक्टर, कलेक्टर को करना पड़ा बीच-बचाव

दौसा, राजस्थान राजस्थान के दौसा जिले के सबसे बड़े अस्पताल रामकरण जोशी जिला चिकित्सालय में शुक्रवार को चिकित्सा सेवाएं उस समय ठप हो गईं जब मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के डॉक्टरों के बीच चल रहे विवाद ने गंभीर रूप ले लिया। मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, जिसके बाद जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार को खुद मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा।


मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने किया कार्य बहिष्कार

शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए अचानक काम बंद कर दिया और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। डॉक्टरों का आरोप था कि उन्हें जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से नोटिस दिए जा रहे हैं और उनके कार्यक्षेत्र में अनुचित दखल दिया जा रहा है।


कलेक्टर ने किया दोनों पक्षों के बीच संवाद

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने शनिवार को जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को अपने चेंबर में बुलाया और एक-एक मुद्दे पर चर्चा की। इस बैठक में दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ जिससे अस्पताल की व्यवस्थाएं फिर से पटरी पर आ सकीं।


समझौते के मुख्य बिंदु:

  1. जब तक जिला अस्पताल में स्थायी मेडिकल अधीक्षक नियुक्त नहीं होता, तब तक पीएमओ (Principal Medical Officer) किसी मेडिकल कॉलेज फैकल्टी को नोटिस या कमेटी के तहत नहीं लाएंगे।

  2. मेडिकल फैकल्टी के साथ किसी भी प्रकार का अनुचित व्यवहार नहीं किया जाएगा।

  3. अब तक जारी किए गए सभी नोटिस और गठित कमेटियों को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाएगा।

  4. हर महीने दो बार पीएमओ और प्रिंसिपल के बीच बैठकें होंगी।

  5. विभागाध्यक्षों के कार्य क्षेत्र में कोई अतिक्रमण नहीं होगा।

  6. मरीजों के हित में सभी डॉक्टर सामंजस्य के साथ कार्य करेंगे।


"अगर फिर हुआ ऐसा, तो ताल ठोकेंगे": प्रोफेसर डॉ. रमेशचंद्र शर्मा

मेडिकल कॉलेज के सीनियर प्रोफेसर डॉ. रमेशचंद्र शर्मा ने समझौते के बाद भी साफ कहा—

"अगर किसी महिला डॉक्टर या किसी भी चिकित्सक के साथ फिर गलत हुआ तो हम चुप नहीं बैठेंगे। हमारी प्राथमिकता मरीज है, लेकिन सम्मान भी जरूरी है।"


"मेरे लिए सारे डॉक्टर बड़े हैं": पीएमओ डॉ. आर.के. मीणा

पीएमओ डॉ. आर.के. मीणा ने कहा—

“किसी महिला डॉक्टर ने मुझसे सीधे कोई शिकायत नहीं की थी। जब कलेक्टर साहब ने पूछा तो उन्होंने कहा कि उन्हें कोई शिकायत नहीं थी। आज से सभी डॉक्टर काम पर लौट रहे हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "डॉक्टरों में कभी-कभी इगो क्लैश हो जाता है, लेकिन मेरे नजरों में सभी डॉक्टर बड़े हैं।"


निष्कर्ष

इस विवाद ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि प्रशासनिक संवाद और पारदर्शिता से किसी भी संकट का समाधान निकाला जा सकता है। मरीजों की सेवा ही हर डॉक्टर का पहला कर्तव्य है, और उम्मीद है कि दौसा का यह उदाहरण भविष्य में अन्य संस्थानों के लिए एक सकारात्मक सीख बनेगा।

Written By

Monika Sharma

Desk Reporter

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