राजस्थान विधानसभा : में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के खिलाफ कार्रवाई होगी या नहीं, इस पर फैसला लिया जा सकता है। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि डोटासरा ने उनके खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया, इसलिए वे सदन के सदस्य बने रहने योग्य नहीं हैं।
पिछले बजट सत्र में कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर को 6 महीने के लिए निलंबित किया गया था। तब स्पीकर ने कहा था कि भाकर ने अनुशासनहीनता की, मार्शल का हाथ काटा और निलंबन के बावजूद सदन से बाहर नहीं गए। इसके बाद प्रस्ताव लाया गया और निलंबन लागू कर दिया गया। अब डोटासरा पर भी ऐसा ही एक्शन लिए जाने की चर्चा है। स्पीकर ने शुक्रवार को सत्ता पक्ष से प्रस्ताव लाने को कहा था, जिसके बाद नियमों के तहत कार्रवाई होगी।
डोटासरा ने खुद पर लगे आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि अगर उनके खिलाफ कोई वीडियो या ऑडियो प्रमाण है तो उसे सदन में प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर ऐसा कोई प्रमाण पेश किया जाता है तो वे स्पीकर के कहे अनुसार कदम उठाने को तैयार हैं।
महाराष्ट्र विधानसभा में भी ऐसा ही मामला सामने आया था, जब 12 विधायकों को एक साल के लिए निलंबित कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को लोकतंत्र के मूलभूत ढांचे के खिलाफ बताते हुए इसे अस्वीकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय तक किसी विधायक को निलंबित करना उस निर्वाचन क्षेत्र के प्रतिनिधित्व के अधिकार को प्रभावित करता है। संविधान के अनुसार, किसी विधायक को अधिकतम एक सत्र या पांच बैठकों के लिए ही निलंबित किया जा सकता है।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या डोटासरा पर कोई कार्रवाई होती है या गतिरोध खत्म कर सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाई जाएगी। सत्ता पक्ष की मंशा साफ दिख रही है कि डोटासरा के खिलाफ प्रस्ताव लाया जाए, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक साजिश बता रही है।
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