राजस्थान : के झुंझुनूं जिले के धनूरी थाना क्षेत्र में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। दिल्ली के नजफगढ़ निवासी एक साधु की मौत के बाद उसका शव पुजारी के नाम पर दर्ज कर दिया गया, जिससे भ्रम की स्थिति बन गई।
धनूरी थाना क्षेत्र के कांट गांव स्थित बालाजी मंदिर के पुजारी चेतनगिरी के पास 8 फरवरी को साधु कुलदीप ब्राह्मण आकर ठहरा था। 12 फरवरी को उसकी तबीयत बिगड़ने लगी तो पुजारी उसे इलाज के लिए बिसाऊ और फिर झुंझुनूं के बीडीके अस्पताल लेकर गया। साधु के पास कोई पहचान पत्र नहीं था, इसलिए पुजारी ने अपना आधार कार्ड देकर अस्पताल में रजिस्ट्रेशन करा दिया।
22 फरवरी को साधु की हालत और ज्यादा खराब हो गई, जिसके बाद उसे जयपुर के एसएमएस अस्पताल रेफर किया गया। वहां इलाज के दौरान उसी रात उसकी मौत हो गई। चूंकि अस्पताल में रजिस्ट्रेशन पुजारी चेतनगिरी के आधार कार्ड से हुआ था, इसलिए मृत्यु प्रमाण पत्र भी उसी के नाम पर बन गया और शव भी उसे सौंप दिया गया।
पुजारी साधु का शव लेकर अपने गांव बिरमी पहुंचा और अंतिम संस्कार की तैयारी करने लगा। इसी दौरान ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने दस्तावेज मांगे तो सामने आया कि सरकारी रिकॉर्ड में पुजारी चेतनगिरी की मृत्यु दर्ज हो चुकी है, जबकि वह खुद जिंदा खड़ा था।
पुलिस ने मामले की जांच की और मृतक साधु की असली पहचान उजागर की। इसके बाद उसके दस्तावेज मंगवाए गए और पोस्टमार्टम करवाया गया। सही पहचान सामने आने पर पुजारी ने राहत की सांस ली।
यह मामला प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सतर्कता की जरूरत को दर्शाता है, क्योंकि एक छोटी सी गलती से पुजारी को मृत घोषित कर दिया गया था।
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