जयपुर: राजधानी जयपुर में साइबर पुलिस थाना ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ी एक बड़ी साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शातिर साइबर ठग गिरोह के दो आरोपियों अमोल चौपड़ा और सक्षम खण्डेलवाल को गिरफ्तार किया है। वहीं, गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी आम लोगों को फर्जी और मैलिशियस लिंक भेजते थे। जैसे ही पीड़ित उस लिंक पर क्लिक करता, उसका मोबाइल फोन हैक हो जाता। इसके बाद आरोपी पीड़ितों के क्रेडिट और डेबिट कार्ड का डेटा चोरी कर लेते थे।
चोरी किए गए कार्ड डिटेल्स का इस्तेमाल कर आरोपी Flipkart, Amazon, Swiggy, Zepto, Blinkit जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से महंगे मोबाइल फोन और अन्य सामान ऑर्डर करते थे।
पूरे मामले का खुलासा एक मुखबिर से मिली गोपनीय सूचना के आधार पर हुआ। इसके बाद साइबर पुलिस की टीम ने तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए आरोपियों की पहचान की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पुलिस जांच से बचने और पैसों के लेन-देन को छुपाने के लिए क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल करते थे। साइबर ठगी से कमाई गई रकम को डिजिटल वॉलेट और क्रिप्टो प्लेटफॉर्म में बदल दिया जाता था।
पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने बताया कि ऑनलाइन साइबर धोखाधड़ी की रोकथाम के लिए एसीपी (क्राइम) मनीष अग्रवाल के निर्देशन में विशेष टीमों का गठन किया गया था।
डीसीपी क्राइम अभिजीत सिंह ने बताया कि आरोपी थर्ड पार्टी एप्लिकेशन और डिजिटल पहचान चोरी के जरिए भुगतान करते थे। वे Flipkart Minute जैसी इंस्टेंट डिलीवरी सेवाओं से कम समय में सामान मंगाते थे।
जांच में यह भी सामने आया कि साइबर ठगी से खरीदे गए मोबाइल फोन को नेपाल के रास्ते अन्य देशों में भेजा जाता था, जिसके सबूत पुलिस को मिले हैं।
मामले में साइबर पुलिस थाने में विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
गिरफ्तार आरोपी अमोल चौपड़ा को न्यायिक अभिरक्षा (JC) में भेज दिया गया है, जबकि कोर्ट ने दूसरे आरोपी सक्षम खण्डेलवाल को दो दिन की पुलिस रिमांड पर सौंपा है।
पुलिस अब इस गिरोह के डिजिटल, वित्तीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की गहन जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में इसे अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह माना जा रहा है।
जयपुर साइबर पुलिस की इस कार्रवाई से ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए होने वाली साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। फर्जी लिंक, मोबाइल हैकिंग, कार्ड डेटा चोरी और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए लेन-देन जैसे तरीकों से यह गिरोह आम लोगों को निशाना बना रहा था। पुलिस की सख्त कार्रवाई से ऐसे साइबर अपराधियों पर लगाम लगाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
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