मध्य प्रदेश: के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर वर्षों से चला आ रहा हिंदू और मुस्लिम पक्षों का विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने आया। बसंत पंचमी के दिन पूरे समय पूजा की अनुमति की मांग को लेकर हिंदू पक्ष ने याचिका दायर की थी, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इसका विरोध किया था।
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ — जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली — ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने बसंत पंचमी के दिन हिंदू पक्ष को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा करने की अनुमति दी है। वहीं, मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार के दिन दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक जुमे की नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों समुदायों के लिए परिसर के भीतर अलग-अलग स्थान और आने-जाने के लिए अलग रास्ते उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि किसी प्रकार का टकराव न हो।
कोर्ट ने राज्य और जिला प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। प्रशासन श्रद्धालुओं की संख्या के अनुसार पास जारी कर सकता है या अन्य उपयुक्त व्यवस्था लागू कर सकता है, जिससे किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
मुस्लिम पक्ष से कहा गया है कि दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज के लिए आने वाले लोगों की संख्या जिला प्रशासन को पहले ही बता दी जाए।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई द्वारा किए गए वैज्ञानिक सर्वे पर भी अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा ASI को दिए गए निर्देश स्थल की वास्तविक और ऐतिहासिक पहचान स्पष्ट करने के उद्देश्य से थे।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि:
हाई कोर्ट रिपोर्ट को खुली अदालत में खोले
दोनों पक्षों को सर्वे रिपोर्ट की प्रतियां दी जाएं
यदि रिपोर्ट का कोई हिस्सा सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, तो वकीलों की मौजूदगी में निरीक्षण की अनुमति दी जाए
इसके बाद दोनों पक्षों को दो सप्ताह के भीतर अपनी आपत्तियां और सुझाव दाखिल करने का अवसर मिलेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट में लंबित रिट याचिका पर वरिष्ठतम जजों की डिवीजन बेंच द्वारा, संभव हो तो दो सप्ताह के भीतर सुनवाई शुरू की जाए और उसके बाद मामले का अंतिम निर्णय लिया जाए।
हिंदू पक्ष ने 20 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर बसंत पंचमी के पूरे दिन अखंड सरस्वती पूजा की अनुमति मांगी थी। इस वर्ष बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ रही है, जिस दिन भोजशाला में जुमे की नमाज होती है। इसी कारण दोनों धार्मिक गतिविधियों के समय को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
धार भोजशाला एक एएसआई संरक्षित स्मारक है। हिंदू पक्ष इसे देवी सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यहां मौलाना कमालुद्दीन की मस्जिद स्थित है।
18वीं सदी में अंग्रेजी शासन के दौरान कराई गई खुदाई में देवी सरस्वती की प्रतिमा मिलने का दावा किया गया था, जिसे बाद में लंदन ले जाया गया। यह प्रतिमा आज भी लंदन के संग्रहालय में मौजूद बताई जाती है।
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार हिंदू पक्ष को हर मंगलवार पूजा और मुस्लिम पक्ष को हर शुक्रवार नमाज की अनुमति दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और बसंत पंचमी के मद्देनज़र धार जिले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। आठ हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी रखी जा रही है और संवेदनशील इलाकों में पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है।
धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने संतुलन और संवैधानिक मर्यादा को प्राथमिकता देते हुए दोनों समुदायों को सीमित और नियंत्रित रूप में धार्मिक गतिविधियों की अनुमति दी है। अब इस विवाद की दिशा एएसआई सर्वे रिपोर्ट और हाई कोर्ट की अंतिम सुनवाई तय करेगी।
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