सीकर, राजस्थान: सीकर में पूर्व सरपंच सरदार राव के मर्डर केस में लगभग 9 साल बाद एससी-एसटी कोर्ट ने फैसला सुनाया है। अदालत ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को बरी कर दिया, जबकि 3 दोषियों को उम्रकैद और 6 को 10-10 साल की सजा सुनाई गई।
सरदार राव, जो 2010 से 2014 तक जुराठड़ा ग्राम पंचायत के सरपंच रहे, 2015 के चुनाव में हार गए थे। उनके खिलाफ चुनावी रंजिश और राजनीतिक दबाव के चलते यह हत्या हुई थी।
हरदेवा राम ने अपने परिवार के सदस्यों को चुनाव में लड़ाने की तैयारी की थी।
हार का डर और विरोधी प्रत्याशी की बढ़ती लोकप्रियता के चलते उन्होंने अजमेर जेल में बंद सुभाष मूंड (बराल) से सरदार राव को मारने की सुपारी दी।
पुलिस जांच में सामने आया कि बराल ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से मदद मांगी, जिसके बाद लॉरेंस के शूटरों ने 23 अगस्त 2017 को सरदार राव को गोलियों से भून दिया।
कोर्ट ने दोषियों को इस प्रकार सजा सुनाई:
उम्रकैद: हरदेवा राम, भानु प्रताप, कुलदीप
10 साल की सजा: सुनील, मुकेश, ओम प्रकाश, हरविंदर, अरुण, नरेंद्र
फरार: सुभाष बराल को मफरूर मानते हुए फैसला नहीं सुनाया गया
इसके अलावा 5 अन्य आरोपी—विजयपाल नागवा, रेडी, रविंद्र, संपत नेहरा और जग्गू भगवान पुरिया—के खिलाफ CRPC धारा 173(8) में जांच पेंडिंग है।
मामले में शूटर अंकित भादू पहले ही पंजाब के मोहाली में एनकाउंटर में मारा जा चुका है।
सजा सुनाने के समय सभी दोषियों को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में लाया गया। अदालत ने अपने फैसले में हत्या के चौंकाने वाले राजनीतिक और गैंगस्टर कनेक्शन को उजागर किया।
यह मामला यह दिखाता है कि राजनीतिक रंजिश और सत्ता संघर्ष किस हद तक अपराध को जन्म दे सकते हैं। लॉरेंस बिश्नोई को बरी किया जाना इस केस की जटिलताओं और सबूतों की परतों को सामने लाता है। वहीं, दोषियों को सुनाई गई कड़ी सजा यह संदेश देती है कि चुनावी हिंसा और हत्या के मामले में कानून सख्त है।
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