पत्नी और 6 माह के बेटे की कुल्हाड़ी से हत्या करने वाले को फांसी: कोर्ट बोली- जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो मृत्युदंड ही न्याय

कोटा: में पत्नी और 6 माह के मासूम बेटे की बेरहमी से कुल्हाड़ी से हत्या करने वाले दोषी को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। कोटा की ADJ कोर्ट-2 ने इस 5 साल पुराने डबल मर्डर केस को “रेयर ऑफ द रेयरेस्ट” मानते हुए दोषी पिंटू (45) को मृत्युदंड देने का फैसला सुनाया। इसके साथ ही कोर्ट ने उस पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश सरिता धाकड़ ने कड़े शब्दों में टिप्पणी की कि दोषी का दायित्व पत्नी और नाबालिग बच्चे का पालन-पोषण करना था, लेकिन वही उनका हत्यारा बन गया। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो परिवार में कौन सुरक्षित रहेगा? यह अपराध मानवता को शर्मसार करने वाला है।

पत्नी को काटा, बच्चे की भी गई जान

अदालत के अनुसार, दोषी पिंटू ने जून 2021 में रामपुरा थाना क्षेत्र के भाटापाड़ा इलाके में अपनी पत्नी सीमा पर कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ वार किए। गर्दन, पेट और पैरों पर गंभीर चोटें पहुंचाई गईं। इसी दौरान 6 माह के बेटे को भी चोटें आईं, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।

हमले के बाद पिंटू अपनी लहूलुहान पत्नी को हाथ पकड़कर घसीटता हुआ तिराहे तक ले गया और वहां चिल्लाता रहा। इसके बाद वह पैदल रामपुरा थाने पहुंचा और पुलिस से कहा— “मैंने अपनी पत्नी को मार डाला है, मुझे गिरफ्तार कर लो।”

CCTV फुटेज बना सबसे बड़ा सबूत

घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया था, जिसमें पिंटू खून से सनी कुल्हाड़ी हाथ में लिए अपनी पत्नी को सड़क पर घसीटते हुए दिखाई दे रहा था। यह फुटेज कोर्ट में अहम सबूत बना। मृतका के भाई प्रदीप कुमार ने मामले की शिकायत दर्ज करवाई थी।

पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर चालान पेश किया। ट्रायल के दौरान कोर्ट में 23 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

कोर्ट ने फैसले में कही 3 अहम बातें

1. रेयर ऑफ द रेयरेस्ट केस
अभियोजक भारत सिंह आसावत ने बताया कि कोर्ट ने इस मामले को अत्यंत दुर्लभ श्रेणी में रखा। कोर्ट ने कहा कि जब कोई व्यक्ति जानवर तक को पालने के बाद नुकसान नहीं पहुंचाता, तो पत्नी और बच्चे की ऐसी हत्या अमानवीय है।

2. दोषी की राक्षसी प्रवृत्ति
कोर्ट ने माना कि आरोपी मृतकों का पति और पिता था। इसके बावजूद जिस निर्दयता से उसने हत्या की, उससे उसकी पैशाचिक और राक्षसी मानसिकता स्पष्ट होती है। उसमें नाममात्र की भी मानवता शेष नहीं थी।

3. मृत्युदंड से कम सजा न्याय को विफल करेगी
कोर्ट ने कहा कि यदि दोषी को मृत्युदंड से कम कोई भी सजा दी गई, तो न्याय का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। इससे समाज में ऐसे अपराधियों का मनोबल बढ़ेगा और आम जनता में डर का माहौल बनेगा।

सजा के बाद पुलिस अभिरक्षा में भेजा गया

फैसला सुनाए जाने के बाद पिंटू को पुलिस अभिरक्षा में वापस जेल भेज दिया गया। कोर्ट ने साफ कहा कि यह फैसला समाज में कानून का भय और न्याय की भावना बनाए रखने के लिए आवश्यक है।


निष्कर्ष:

कोटा के इस डबल मर्डर केस में आया फैसला न्यायपालिका के सख्त और स्पष्ट संदेश को दर्शाता है। पत्नी और मासूम बेटे की नृशंस हत्या करने वाले को फांसी की सजा देकर कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि ऐसे अमानवीय अपराधों के लिए समाज में कोई जगह नहीं है और मृत्युदंड ही न्याय का एकमात्र विकल्प है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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