“फालतू बात मत करो, गलत हो जाएगा” — अतिक्रमण हटाने पहुंचे तहसीलदार से कांग्रेस विधायक की तीखी नोकझोंक, दौसा में हंगामा

दौसा: में अतिक्रमण हटाने के दौरान प्रशासन-राजनीति आमने-सामने

दौसा में सोमवार को सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कांग्रेस विधायक और तहसीलदार के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। मामला जयपुर-दौसा हाईवे पर ट्रक यूनियन कार्यालय के सामने स्थित रानी की बीड नामक सरकारी भूमि का है, जहां अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासनिक टीम को कांग्रेस विधायक दीनदयाल बैरवा ने रोकने का प्रयास किया।


आदेश मांगने पर भड़के तहसीलदार

विधायक बैरवा ने तहसीलदार से अतिक्रमण तोड़ने का आदेश दिखाने को कहा। इस पर तहसीलदार गजानंद मीणा ने तीखे लहजे में जवाब दिया—

“सरकारी जमीन का मालिक मैं खुद हूं, इसमें मुझे कौन आदेश देगा। जमीन मेरी है, फालतू बात मत करो।”

तहसीलदार के इस बयान से विधायक नाराज हो गए और मौके पर माहौल तनावपूर्ण हो गया।


विधायक-तहसीलदार की नोकझोंक के प्रमुख अंश

विधायक: आपके पास तोड़ने का आदेश क्या है, बताइए।
तहसीलदार: सरकारी जमीन है, मुझे कोई आदेश नहीं देगा।
विधायक: यहां पूरा दौसा ही सरकारी जमीन में आता है।
तहसीलदार: तो फोटो खींच लो, कोर्ट चले जाओ।
विधायक: जेसीबी रुकवाओ।
तहसीलदार: एमएलए साहब, फालतू बात मत करो, गलत बात हो जाएगी।

इसी दौरान तहसीलदार ने जेसीबी से कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दे दिए।


गरीबों के मकान तोड़ने का आरोप

विधायक बैरवा ने आरोप लगाया कि गरीब लोगों के मकान तोड़े जा रहे हैं और उन्हें थाने में बंद करवाने की धमकी दी गई। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और अधिकारियों ने बीच-बचाव कर स्थिति को संभाला।


12 बीघा सरकारी जमीन पर थी अवैध कॉलोनी

तहसीलदार गजानंद मीणा ने बताया कि—

“रानी की बीड के नाम से दर्ज करीब 12 बीघा बेशकीमती सरकारी भूमि पर भू-माफियाओं ने अवैध कॉलोनी काट दी थी। कार्रवाई के दौरान कई पक्के निर्माण ध्वस्त किए गए।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानीय लोगों ने विरोध नहीं किया, सिर्फ विधायक ने आपत्ति जताई।


विधायक बोले— मुझे जेल भेजने की धमकी दी

विधायक दीनदयाल बैरवा ने कहा कि—

“कई लोगों के पास पट्टे हैं और कई मामलों में कोर्ट केस चल रहे हैं। जब मैंने कोर्ट का आदेश मांगा तो तहसीलदार ने खुद को जमीन का मालिक बताकर मुझसे अशोभनीय व्यवहार किया और जेल भेजने की धमकी दी।”

उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत जिला कलेक्टर से करने की बात कही।


भारी पुलिस जाब्ते में जारी रही कार्रवाई

विवाद के बावजूद भारी पुलिस बल और प्रशासनिक कर्मचारियों की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी रही। जेसीबी से अवैध निर्माण तोड़े गए और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।


निष्कर्ष:

दौसा में यह घटना प्रशासनिक सख्ती और राजनीतिक हस्तक्षेप के टकराव की बड़ी मिसाल बनकर सामने आई है। एक ओर प्रशासन सरकारी जमीन खाली कराने पर अड़ा रहा, तो दूसरी ओर विधायक ने गरीबों के हित का मुद्दा उठाया। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर और तूल पकड़ सकता है

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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