नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मलेशिया के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर रवाना हो गए हैं। इस यात्रा के दौरान वे मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से मुलाक़ात करेंगे और दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने पर बातचीत करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने यात्रा से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि वे अपने मित्र प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के निमंत्रण पर मलेशिया जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत और मलेशिया के बीच गहरे और व्यापक संबंध रहे हैं और दोनों देशों की दोस्ती का एक मजबूत आधार है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में मलेशिया में रह रहे भारतीय समुदाय की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि मलेशिया में लगभग 30 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो दुनिया के सबसे बड़े भारतीय प्रवासी समुदायों में से एक हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय प्रवासी न केवल मलेशिया की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, बल्कि भारत-मलेशिया की ऐतिहासिक दोस्ती को भी मजबूत बना रहे हैं।
मलेशिया में भारत के उच्चायुक्त बीएन रेड्डी ने बताया कि प्रधानमंत्री की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई दिशा देना है।
उन्होंने कहा कि भारत और मलेशिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार 20 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है और दोनों देश इसे और बढ़ाने की संभावनाओं पर गंभीरता से काम कर रहे हैं।
बीएन रेड्डी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के एजेंडे में कई अहम बिंदु शामिल हैं। इनमें
10वां भारत-मलेशिया सीईओ फोरम
व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) की समीक्षा
आसियान-भारत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में अब तक हुई प्रगति पर चर्चा
शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे से भारत और मलेशिया के बीच आर्थिक साझेदारी को नई गति मिलेगी और भारत-आसियान संबंधों को भी मजबूती मिलेगी।
भारत और मलेशिया के रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सांस्कृतिक, शैक्षिक और रणनीतिक सहयोग भी इन संबंधों का अहम हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को और गहरा करने का अवसर मानी जा रही है।
निष्कर्ष:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मलेशिया दौरा भारत-मलेशिया संबंधों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, निवेश और आसियान सहयोग पर होने वाली बातचीत से दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, यह यात्रा भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को भी और मजबूत कर सकती है।
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