अलवर DIPR अधिकारी पर गंभीर आरोप: पत्रकारों से भेदभाव, सूचना रोकने और दोगली नीति का मामला तूल पकड़ा

अलवर। अलवर जिला सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (DIPR) में कार्यरत एक अधिकारी पर पत्रकारों के साथ भेदभाव, पक्षपात और दोगली नीति अपनाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। जिले के कई पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि संबंधित अधिकारी राजस्थान सरकार के नेताओं और मंत्रियों का नाम लेकर मीडिया कर्मियों के साथ अनुचित व्यवहार कर रहे हैं।

पत्रकारों का कहना है कि सूचना के अधिकार और समान व्यवहार का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। विभाग की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस, सरकारी कार्यक्रमों और महत्वपूर्ण सूचनाओं की जानकारी चुनिंदा पत्रकारों को ही दी जाती है, जबकि अन्य अधिकृत पत्रकारों को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।

शिकायतें दबाने का आरोप

मीडिया कर्मियों का आरोप है कि उन्होंने इस संबंध में कई बार लिखित शिकायतें दीं, लेकिन हर बार उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि मामला ‘विचाराधीन’ है। आरोप है कि शिकायतों पर न तो कोई निष्पक्ष जांच की गई और न ही जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई हुई।

पत्रकारों ने बताया कि 4 दिसंबर 2023 को दी गई शिकायत पर भी अब तक कोई परिणाम सामने नहीं आया है। यहां तक कि सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत मांगी गई रिपोर्ट को भी जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है।

ग्रामीण पत्रकार सबसे ज्यादा प्रभावित

ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत कई अधिकृत पत्रकारों का कहना है कि सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बावजूद उनके नाम विभागीय सूची में शामिल नहीं किए गए। इससे उन्हें सरकारी कार्यक्रमों, सूचनाओं और प्रशासनिक समन्वय में लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

पत्रकारों का आरोप है कि यह सब एक सोची-समझी नीति के तहत किया जा रहा है, ताकि कुछ खास मीडिया समूहों को ही लाभ पहुंचाया जा सके।

आयुक्त कार्यालय तक पहुंची शिकायत

मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्रकारों ने सूचना एवं जनसंपर्क विभाग राजस्थान (DIPR) के आयुक्त कार्यालय को भी शिकायत भेजी है। इसके बावजूद अब तक किसी निष्पक्ष जांच या कार्रवाई के संकेत नहीं मिले हैं।

आंदोलन की चेतावनी

पत्रकार संगठनों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।

पत्रकारों का कहना है कि यह मामला अब केवल सूचनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सम्मान, अधिकार और स्वतंत्र पत्रकारिता की लड़ाई बन चुका है, जिसे किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा।


निष्कर्ष:

अलवर DIPR से जुड़ा यह विवाद प्रशासनिक पारदर्शिता और मीडिया अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल पत्रकारों के साथ अन्याय है, बल्कि लोकतंत्र की मूल भावना के भी खिलाफ है। अब सबकी निगाहें विभागीय जांच और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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