जयपुर। राजस्थान की सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों और क्लासरूम की मरम्मत को लेकर Rajasthan High Court में सुनवाई के दौरान सरकार को कड़ी टिप्पणी का सामना करना पड़ा।
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि चालू बजट में स्कूलों की मरम्मत के लिए 550 करोड़ रुपए, नए भवन निर्माण के लिए 450 करोड़ रुपए और स्कूल लैब के लिए 200 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
मामले की सुनवाई जस्टिस महेन्द्र गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने की। सरकार के बजट प्रावधान पर मौखिक टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा कि यह राशि “ऊंट के मुंह में जीरा” के समान है।
पिछली सुनवाई में शिक्षा विभाग ने स्वयं अदालत को बताया था कि प्रदेश की सरकारी स्कूलों की मरम्मत के लिए करीब 20 हजार करोड़ रुपए की आवश्यकता है। इस पर अदालत ने कहा, “जब आवश्यकता 20 हजार करोड़ की है, तो आप 2 हजार करोड़ रुपए भी नहीं जुटा पाए हैं।”
खंडपीठ ने सरकार से कहा कि जो राशि बजट में दी गई है, वह पर्याप्त नहीं है। अदालत ने सुझाव दिया कि सरकार को कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) और भामाशाहों से भी सहयोग लेने की व्यवस्था करनी चाहिए।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि जो राशि एकत्र की जाती है, वह कई बार अन्य मदों में खर्च हो जाती है। ऐसे में अदालत ने सवाल उठाया कि क्या केवल अत्यावश्यक टेंडरों को छोड़कर बाकी टेंडर जारी करने पर रोक लगा दी जाए, ताकि उपलब्ध राशि जरूरी कार्यों में ही खर्च हो सके।
अदालत ने संकेत दिए कि स्कूलों की मरम्मत के लिए जारी राशि का सही उपयोग सुनिश्चित करने हेतु एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जा सकती है।
कोर्ट ने सभी पक्षों से सुझाव मांगे हैं कि कमेटी में किन-किन लोगों को शामिल किया जाए और अतिरिक्त फंड की व्यवस्था किस प्रकार की जाए। मामले की अगली सुनवाई 5 मार्च को निर्धारित की गई है।
यह सुनवाई झालावाड़ में हुए स्कूल हादसे के बाद स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज जनहित याचिका पर हो रही है। अदालत प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों की इमारतों की स्थिति और विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है।
सरकार द्वारा 550 करोड़ रुपए के बजट प्रावधान की जानकारी देने के बावजूद हाईकोर्ट ने इसे अपर्याप्त बताते हुए सख्त रुख अपनाया है। 20 हजार करोड़ की अनुमानित आवश्यकता के मुकाबले मौजूदा आवंटन को अदालत ने नाकाफी माना है। अब निगाहें 5 मार्च की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां मॉनिटरिंग कमेटी और अतिरिक्त फंड की व्यवस्था पर महत्वपूर्ण निर्णय संभव है।
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