जयपुर। राजधानी जयपुर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जयपुर नगर निगम की पशु प्रबंधन शाखा के दो वेटरनरी डॉक्टर और एक संविदाकर्मी को 4 लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
यह कार्रवाई Anti Corruption Bureau Rajasthan (ACB) की टीम ने सोमवार को की।
एसीबी के अनुसार, परिवादी को आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का टेंडर मिला था। कार्य पूरा होने के बाद उसने भुगतान के लिए बिल नगर निगम में प्रस्तुत किए।
आरोप है कि कुत्तों से निकाले गए यूट्रस (Uterus) और टेस्टिकल्स (Testicles) की गणना कर फाइल आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत की मांग की गई।
एसीबी डीजी Govind Gupta ने बताया कि नगर निगम हैरिटेज के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. योगेश शर्मा और नगर निगम ग्रेटर के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश कलोरिया पर रिश्वत मांगने का आरोप है।
शिकायत के सत्यापन में सामने आया कि दोनों अधिकारियों ने बकाया बिलों को पास करने के बदले कुल 15 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी।
आरोप है कि 2 लाख रुपए प्रति माह के हिसाब से 4 लाख रुपए और 1 जनवरी 2026 से 3.50 लाख रुपए प्रति माह की दर से अतिरिक्त राशि मांगी जा रही थी।
रिश्वत की रकम सीधे लेने के बजाय डॉक्टर अपने कार्यालय के संविदा कर्मचारी एवं कम्प्यूटर ऑपरेटर जितेंद्र सिंह शेखावत के जरिए राशि मंगवा रहे थे।
एसीबी टीम ने शिकायत का सत्यापन करने के बाद ट्रैप की कार्रवाई की। सोमवार को जितेंद्र सिंह शेखावत को 4 लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया।
इसके बाद दोनों पशु चिकित्सा अधिकारियों से पूछताछ की गई और उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया। कार्रवाई के दौरान एसीबी अधिकारी नगर निगम परिसर में मौजूद रहे।
यह कार्रवाई एसीबी के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) के सुपरविजन में और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एसीबी जयपुर नगर-प्रथम के नेतृत्व में की गई।
एसीबी अब मामले में आगे की पूछताछ और दस्तावेजी जांच कर रही है।
जयपुर नगर निगम में हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिल पास करने जैसी प्रशासनिक प्रक्रिया में रिश्वत मांगना गंभीर अपराध है। एसीबी की इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जा रहा है। अब जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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