देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड का मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। वायरल वीडियो और वीआईपी एंगल को लेकर विपक्ष के लगातार हमलों के बाद राज्य के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस कर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा—
“सबूत लाओ, सरकार हर जांच के लिए तैयार है। बिना प्रमाण के आरोप लगाना न्याय के साथ खिलवाड़ है।”
मंत्री उनियाल ने कहा कि इस मामले की एसआईटी जांच को सत्र न्यायालय, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तीनों स्तरों पर सही ठहराया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालतों ने स्वयं माना था कि इस केस में CBI जांच की कोई आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि एक दुखद घटना को बार-बार राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है, जबकि न्यायिक प्रक्रिया अपना काम कर चुकी है।
यह मामला तब फिर चर्चा में आया जब भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। फेसबुक लाइव में महिला ने अंकिता हत्याकांड में एक कथित “वीआईपी गट्टू” का जिक्र किया और उसे भाजपा का बड़ा नेता बताया।
वीडियो में उन्होंने यह भी दावा किया कि हत्या वाले दिन वह वीआईपी वनंत्रा रिजॉर्ट में मौजूद था और एक पूर्व जिला पंचायत सदस्य के पास इससे जुड़ी अहम जानकारी है। साथ ही एक ऑडियो का भी उल्लेख किया गया, जिसने मामले को और हवा दे दी।
वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर सीधा हमला बोला।
उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने दिल्ली में प्रेसवार्ता कर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार जानबूझकर वीआईपी का नाम छिपा रही है।
कांग्रेस ने मांग की कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में CBI से कराई जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि दस दिनों के भीतर CBI जांच की सिफारिश नहीं की गई, तो कांग्रेस प्रदेशभर में आंदोलन करेगी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि चुनाव से पहले कांग्रेस जानबूझकर वीआईपी का मुद्दा उछाल रही है।
उन्होंने कहा—
“अगर कांग्रेस को वीआईपी के बारे में जानकारी है, तो नाम सार्वजनिक करे। बिना सबूत आरोप लगाना शर्मनाक राजनीति है।”
भट्ट ने यह भी याद दिलाया कि घटना के समय तत्कालीन डीजीपी ने सार्वजनिक अपील की थी कि यदि किसी को वीआईपी की जानकारी है, तो सामने आए। लेकिन तब भी कोई प्रमाण नहीं दिया गया और न ही आज।
उन्होंने वायरल वीडियो को अपुष्ट और छेड़छाड़ वाला बताते हुए कहा कि इस मामले में शिकायत दर्ज कराई गई है। भाजपा ने कांग्रेस से बिना पुष्टि आरोप लगाने पर माफी मांगने की मांग की।
18 सितंबर 2022 को वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम कर रही अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि हत्या के बाद उसका शव चीला शक्ति नहर में फेंक दिया गया। लगभग एक सप्ताह बाद शव बरामद हुआ।
एसआईटी जांच के बाद रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता के खिलाफ करीब 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई। अभियोजन पक्ष ने 97 गवाह बनाए, जिनमें से 47 की गवाही हुई।
मुख्य आरोपी पुलकित आर्य पर आईपीसी की धारा 302, 201, 354(ए) और अनैतिक देह व्यापार अधिनियम के तहत आरोप तय हुए। तीनों आरोपियों को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई।
हत्या वाले दिन अंकिता ने अपने मित्र पुष्पदीप को फोन कर बताया था कि रिजॉर्ट में एक बड़ा वीआईपी आने वाला है और उस पर “अतिरिक्त सेवा” देने का दबाव बनाया जा रहा है।
हालांकि, तमाम जांच और अदालती कार्यवाही के बावजूद यह सवाल आज भी कायम है कि वह वीआईपी कौन था?
अंकिता भंडारी हत्याकांड में दोषियों को सजा मिल चुकी है, लेकिन वीआईपी एंगल को लेकर सियासत अब भी थमी नहीं है। मंत्री सुबोध उनियाल का बयान सरकार के रुख को स्पष्ट करता है कि बिना सबूत किसी नई जांच की जरूरत नहीं है। वहीं, कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रही। ऐसे में यह मामला आने वाले समय में उत्तराखंड की राजनीति को और गर्मा सकता है।
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