नई दिल्ली। संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा के लिए राज्यसभा चुनाव 2026 बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं। इस साल राज्यसभा की कुल 71 सीटों पर चुनाव होने हैं, जिनमें 6 केंद्रीय मंत्रियों समेत 71 सांसदों का भविष्य दांव पर होगा। मौजूदा राजनीतिक गणित यह संकेत दे रहा है कि जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपनी स्थिति और मजबूत कर सकती है, वहीं बहुजन समाज पार्टी (BSP) और विपक्ष के लिए हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
इस चुनावी चक्र के बाद राज्यसभा की सियासी तस्वीर पूरी तरह बदलने की संभावना है। खास तौर पर BSP के लिए यह चुनाव ऐतिहासिक रूप से सबसे कठिन साबित हो सकता है।
राज्यसभा चुनाव 2026 के साथ जिन केंद्रीय मंत्रियों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें शामिल हैं—
हरदीप सिंह पुरी (पेट्रोलियम मंत्री)
बीएल वर्मा (सहकारिता राज्य मंत्री)
रामनाथ ठाकुर (संचार एवं पूर्वोत्तर विकास राज्य मंत्री)
रवनीत सिंह बिट्टू (रेलवे और खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री)
जॉर्ज कुरियन (अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री)
रामदास आठवले (सामाजिक न्याय राज्य मंत्री)
इनमें हरदीप पुरी और बीएल वर्मा उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं और नवंबर तक उनका कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। पुरी की उम्र भी रिटायरमेंट के वक्त 75 वर्ष के करीब पहुंचने वाली है, जिससे उनकी वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि राज्यसभा चुनाव 2026 को मोदी मंत्रिपरिषद में संभावित फेरबदल से जोड़कर देखा जा रहा है।
मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, रिटायर होने वाले 71 सांसदों में 30 सांसद भारतीय जनता पार्टी के हैं। इस समय BJP राज्यसभा में अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर 103 सांसदों के साथ मौजूद है। चुनाव के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि कई राज्यों में BJP और उसके सहयोगी दलों की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
उत्तर प्रदेश से सबसे अधिक 10 सांसद रिटायर हो रहे हैं, जिनमें 8 BJP, 1 सपा और 1 BSP से हैं। मौजूदा विधानसभा समीकरणों के आधार पर BJP के 7 और सहयोगी दलों का 1 उम्मीदवार चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है।
कांग्रेस के भी 8 सांसद राज्यसभा से रिटायर हो रहे हैं, जिनमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी शामिल हैं। पश्चिम बंगाल से अप्रैल में तृणमूल कांग्रेस के 5 सांसद और तमिलनाडु से 6 सांसद रिटायर होंगे। असम से भी 3 सांसद इस साल अप्रैल में सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इन सभी राज्यों में इसी साल विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, जिससे राज्यसभा चुनाव 2026 का असर स्थानीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।
राज्यसभा चुनाव 2026 की सबसे चौंकाने वाली तस्वीर बहुजन समाज पार्टी (BSP) के लिए सामने आ रही है। लोकसभा में पहले ही BSP का कोई सांसद नहीं है और अब राज्यसभा से भी पार्टी का पूरी तरह सफाया तय माना जा रहा है।
1984 में स्थापना के बाद 1989 से लगातार संसद में मौजूद BSP के लिए यह पहला मौका होगा, जब लोकसभा और राज्यसभा—दोनों में पार्टी का कोई प्रतिनिधि नहीं रहेगा। यह स्थिति मायावती की पार्टी के लिए अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट मानी जा रही है।
राज्यसभा चुनाव 2026 न सिर्फ सांसदों के भविष्य का फैसला करेगा, बल्कि संसद की ताकत का संतुलन भी बदल सकता है। BJP जहां और मजबूत होती दिख रही है, वहीं BSP और विपक्ष के लिए यह अस्तित्व की लड़ाई बनता जा रहा है। बड़ा सवाल यही है—क्या इन चुनावों के बाद मोदी मंत्रिपरिषद में बड़ा फेरबदल होगा और क्या विपक्ष इस गिरती ताकत को रोक पाएगा?
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