जाम के झाम से बेहाल चित्तौड़गढ़, 8 घंटे तक थम जाती है ज़िंदगी

चित्तौड़गढ़। चित्तौड़गढ़ जिले के निम्बाहेड़ा–मंगलवाड़ राजमार्ग पर स्थित चिकारड़ा कस्बा इन दिनों भीषण जाम की समस्या से जूझ रहा है। यह मार्ग अब यात्रियों के लिए सफर नहीं बल्कि सजा बन चुका है। पिछले करीब 10 दिनों से रोजाना 2 से 8 घंटे तक का जाम लग रहा है, जिससे आमजन के साथ-साथ व्यापार और आपातकालीन सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कस्बे के मुख्य बाजार क्षेत्र में सड़क किनारे और नालियों पर हुए अवैध पक्के निर्माण ने सड़क को इतना संकरा कर दिया है कि दो भारी वाहन—बस या ट्रक—एक साथ निकल ही नहीं सकते


भारी वाहनों के आमने-सामने आते ही थम जाता है रास्ता

स्थिति तब और भयावह हो जाती है जब दो भारी वाहन आमने-सामने आ जाते हैं। इसके बाद वाहनों की कतारें सांप की तरह रेंगने लगती हैं। एक दिन पहले शाम 4:30 बजे शुरू हुआ जाम रात 11 बजे के बाद खुल सका। इस दौरान लोग 5 से 8 घंटे तक सड़क पर फंसे रहे।


धार्मिक और व्यावसायिक मार्ग पर संकट

यह मार्ग धार्मिक और व्यावसायिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। प्रसिद्ध सांवलिया धाम मात्र 7 किलोमीटर दूर स्थित है, जहां मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों से रोजाना हजारों श्रद्धालु इसी मार्ग से आते-जाते हैं। इसके अलावा यह सड़क उदयपुर, चित्तौड़गढ़, निम्बाहेड़ा, डूंगरपुर और बांसवाड़ा जैसे बड़े शहरों को जोड़ती है।


एंबुलेंस भी जाम में बेबस

जाम की सबसे चिंताजनक तस्वीर तब सामने आती है जब गंभीर मरीजों को ले जा रही एंबुलेंस भी इसमें फंस जाती है। कई बार स्थानीय लोग जान जोखिम में डालकर वैकल्पिक कच्चे रास्तों से एंबुलेंस को निकालने का प्रयास करते हैं।


अवैध कब्जे हटाने और पुलिस तैनाती की मांग

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। लोगों ने मांग की है कि डूंगला कस्बे की तरह चिकारड़ा में भी अतिक्रमण मुक्त अभियान चलाया जाए। मेगा हाईवे के दोनों ओर हुए अवैध कब्जों को तुरंत हटाया जाए और पीक आवर्स में पुलिस बल की स्थायी तैनाती की जाए, ताकि जाम की स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।


निष्कर्ष:

चिकारड़ा कस्बे में जाम अब सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि जानलेवा समस्या बनता जा रहा है। यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया और यातायात व्यवस्था नहीं सुधारी गई, तो यह मार्ग किसी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब नींद से जागता है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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