जयपुर। राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (एमपी-एलएडीएस) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने सोमवार को कांग्रेस के तीन सांसदों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे राजस्थान के हिस्से का पैसा हरियाणा में खर्च कर रहे हैं।
मंत्री बेढ़म ने दावा किया कि कांग्रेस सांसद संजना जाटव (भरतपुर), राहुल कसवां (चूरू) और बृजेंद्र सिंह ओला (झुंझुनू) अपने संसदीय क्षेत्रों में विकास कार्य अधूरे छोड़कर हरियाणा के कैथल विधानसभा क्षेत्र में परियोजनाओं पर पैसा खर्च कर रहे हैं।
जवाहर सिंह बेढ़म ने आरोप लगाया कि ये सांसद कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को खुश करने के लिए जनप्रतिनिधि के कर्तव्यों की मर्यादा भूल चुके हैं। उन्होंने कहा कि सांसद निधि का पैसा कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला के बेटे आदित्य सिंह सुरजेवाला के कैथल विधानसभा क्षेत्र में भेजा जा रहा है।
मंत्री ने कहा,
“राजस्थान की जनता ने इन सांसदों को विकास के लिए चुना था, लेकिन वे अपना राजनीतिक भविष्य सुरक्षित करने के लिए राज्य के बाहर धन खर्च कर रहे हैं।”
बेढ़म ने बताया कि नियमों के अनुसार हर सांसद को सालाना 5 करोड़ रुपये की सांसद निधि मिलती है। इसमें से अधिकतम 25 लाख रुपये अपने क्षेत्र के बाहर खर्च किए जा सकते हैं। आपदा की स्थिति में यह सीमा 1 करोड़ रुपये तक हो सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के तीनों सांसद इन सीमाओं से कहीं ज्यादा राशि हरियाणा के कैथल जिले में भेज रहे हैं।
मंत्री के मुताबिक—
संजना जाटव ने 45 लाख रुपये
राहुल कसवां ने 50 लाख रुपये
बृजेंद्र सिंह ओला ने 25 लाख रुपये
कैथल विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए आवंटित किए हैं, जबकि उनके अपने संसदीय क्षेत्रों में कई योजनाएं अधूरी हैं।
जवाहर सिंह बेढ़म ने भरतपुर सांसद संजना जाटव पर विशेष आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने सांसद निधि से 142 कार्यों की सिफारिश की, लेकिन उनमें से केवल 37 कार्य ही पूरे हुए, और वे भी अलवर जिले में।
उन्होंने कहा कि यह बेहद हैरानी की बात है कि जिन लोगों ने उन्हें वोट दिया, उनके क्षेत्र में काम अधूरे पड़े हैं।
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद संजना जाटव ने कहा कि उन्होंने सांसद निधि के नियमों के तहत ही काम किया है। उन्होंने दावा किया कि रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी उनके क्षेत्र को 1 करोड़ रुपये दिए हैं।
वहीं, चूरू सांसद राहुल कसवां ने कहा कि नियमों में दूसरे राज्यों में सीमित राशि खर्च करने का प्रावधान है। सांसद केवल काम की सिफारिश करता है, जबकि मंजूरी और निगरानी प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है।
मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म के आरोपों के बाद राजस्थान की राजनीति में एमपी-एलएडीएस फंड को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जहां भाजपा इसे जनहित के धन का दुरुपयोग बता रही है, वहीं कांग्रेस सांसद नियमों के तहत काम करने की बात कह रहे हैं। अब देखना होगा कि यह मामला केवल सियासी बयानबाजी तक सीमित रहता है या इसकी जांच किसी बड़े स्तर पर होती है।
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