जयपुर/चेन्नई: राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने फर्जी डिग्रियों के बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए भारत सेवक समाज चेन्नई यूनिवर्सिटी (BSS Chennai University) के डायरेक्टर आरून साग बेसन को गिरफ्तार किया है। SOG टीम ने यह गिरफ्तारी चेन्नई से की, जिससे शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है।
SOG की जांच में सामने आया है कि यह यूनिवर्सिटी बिना किसी वैध रजिस्ट्रेशन और मान्यता के संचालित की जा रही थी और यहां से हजारों फर्जी डिग्रियां देशभर में बांटी गईं।
SOG अधिकारियों के अनुसार, BSS चेन्नई यूनिवर्सिटी में
100 से अधिक प्रोफेशनल और तकनीकी कोर्स चलाए जा रहे थे
यूनिवर्सिटी का किसी भी नियामक संस्था से वैध पंजीकरण नहीं था
इसके बावजूद बड़े पैमाने पर डिग्रियां जारी की जा रही थीं
अब इन डिग्रियों की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं और हजारों डिग्रियां जांच के घेरे में आ गई हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस यूनिवर्सिटी ने देशभर में करीब 7000 अन्य संस्थानों को संबद्ध कर रखा था। इन संस्थानों के जरिए छात्रों को कोर्स कराए जाते थे और बाद में उन्हें डिग्रियां उपलब्ध कराई जाती थीं।
SOG ने इस मामले में दौसा (राजस्थान) से एक इंस्टिट्यूट संचालक को भी गिरफ्तार किया है, जो इस नेटवर्क का हिस्सा बताया जा रहा है।
SOG को शक है कि इस यूनिवर्सिटी से जारी फर्जी डिग्रियों का इस्तेमाल कई अभ्यर्थियों ने
फायरमैन भर्ती
लाइब्रेरियन भर्ती
अन्य सरकारी परीक्षाओं
में किया है। यदि यह पुष्टि होती है, तो कई चयन प्रक्रियाएं भी जांच के दायरे में आ सकती हैं।
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि
फर्जी डिग्री का पूरा लेन-देन व्हाट्सऐप के जरिए होता था
डिग्रियां कूरियर के माध्यम से अभ्यर्थियों तक पहुंचाई जाती थीं
मोटी रकम लेकर कम समय में डिग्री उपलब्ध कराई जाती थी
SOG अब डिजिटल चैट्स, कॉल डिटेल्स और ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड खंगाल रही है।
BSS चेन्नई यूनिवर्सिटी फर्जी डिग्री मामला देश के शिक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जयपुर SOG की यह कार्रवाई सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि डिग्री माफिया के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की शुरुआत मानी जा रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां व बड़े खुलासे होने की संभावना है।
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