नई दिल्ली। सोमनाथ मंदिर को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी सोमनाथ यात्रा से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने दावा किया कि सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार का सबसे अधिक विरोध पंडित नेहरू ने किया था और उन्होंने पाकिस्तान को खुश करने के लिए मंदिर के ऐतिहासिक महत्व को नकारने की कोशिश की।
सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस बयान और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए गए दस्तावेजों के हवाले से कहा कि महमूद गजनवी और अलाउद्दीन खिलजी जैसे आक्रांताओं ने मंदिर को केवल भौतिक रूप से नुकसान पहुंचाया था, लेकिन भगवान सोमनाथ के प्रति वैचारिक घृणा नेहरू के मन में थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का न केवल विरोध किया, बल्कि इसे भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि के लिए नुकसानदायक बताया।
भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि नेहरू ने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्हें ‘प्रिय नवाबजादा’ कहकर संबोधित किया गया और सोमनाथ मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों, विशेषकर मंदिर के दरवाजों की कथा को पूरी तरह झूठा बताया गया।
त्रिवेदी का कहना है कि यह पत्र भारत की सभ्यतागत विरासत के बजाय पाकिस्तान को संतुष्ट करने की मानसिकता को दर्शाता है।
भाजपा नेता ने यह भी दावा किया कि नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन समारोह में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के शामिल होने का विरोध किया था। इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों को पत्र लिखकर मंदिर निर्माण की आवश्यकता पर सवाल उठाए थे।
इसके अलावा, नेहरू ने कथित तौर पर सभी मुख्यमंत्रियों को दो बार पत्र लिखकर शिकायत की थी कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण विदेशों में भारत की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है।
सुधांशु त्रिवेदी के अनुसार, नेहरू ने तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री आर.आर. दिवाकर को भी पत्र लिखकर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के प्रचार-प्रसार को कम करने का आग्रह किया था और इसे आडंबरपूर्ण बताया था।
यह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी को सोमनाथ मंदिर में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में शामिल होने वाले हैं। यह पर्व 8 से 11 जनवरी तक चलेगा, जिसमें भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाले कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सोमनाथ मंदिर को लेकर भाजपा द्वारा उठाए गए ये मुद्दे एक बार फिर इतिहास, धर्म और राजनीति के टकराव को सामने ले आए हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से पहले नेहरू के कथित पत्रों और फैसलों को सामने लाकर भाजपा ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है।
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