एक शरीर दो जान: अब OTT की दुनिया में छाएंगे अमृतसर के 'सोना-मोना', इस फिल्म में निभाएंगे रेस्टोरेंट मालिक का रोल

अमृतसर। 'एक शरीर, दो जान' के नाम से दुनिया भर में मशहूर अमृतसर के जुड़वां भाई सोना-मोना (सोहना-मोहना) अब मनोरंजन की दुनिया में एक नया मुकाम हासिल करने जा रहे हैं। अपनी जीवटता और संघर्ष से करोड़ों लोगों को प्रेरित करने वाले ये दोनों भाई अब ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म पर नजर आएंगे। वे धार्मिक पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म 'चलो बुलावा आया है' के जरिए डिजिटल स्क्रीन पर डेब्यू कर रहे हैं।

रेस्टोरेंट मालिक के किरदार में आएंगे नजर 25 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी इस फिल्म को अब ओटीटी पर जारी किया जा रहा है। फिल्म में सोना-मोना ने एक रेस्टोरेंट मालिक का अनूठा किरदार निभाया है। खास बात यह है कि इस फिल्म में वे पंजाबी अभिनेता पुखराज भल्ला के साथ स्क्रीन साझा करते दिखेंगे। हालांकि वे पहले बड़े पर्दे पर छोटे रोल कर चुके हैं, लेकिन ओटीटी प्लेटफॉर्म पर यह उनका पहला बड़ा प्रोजेक्ट है।

कौन हैं सोना-मोना? (अद्भुत जीवन गाथा) सोना और मोना 'कॉनजॉइन्ड चाइल्ड' हैं, जो जन्म से ही एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

  • शारीरिक बनावट: उनका शरीर कमर से ऊपर दो हिस्सों में है (दो सिर, दो दिल, दो फेफड़े और दो रीढ़ की हड्डी), लेकिन नीचे का हिस्सा एक ही है। उनके गुर्दे, लीवर और मूत्राशय आपस में जुड़े हुए हैं।

  • अनोखी पसंद: भले ही शरीर एक है, लेकिन दोनों की पसंद अलग है। सर्दी के मौसम में जहाँ सोना को चॉकलेट पसंद है, वहीं मोहना चाय पीना पसंद करते हैं।

  • सरकारी सेवा: वर्तमान में सोना पंजाब बिजली बोर्ड में जूनियर इंजीनियर (JE) के पद पर तैनात हैं, जबकि मोहना उनके साथ नि:शुल्क सेवा देते हैं।

24 घंटे की दी थी मोहलत, आज हैं दुनिया के लिए मिसाल इनका जन्म 13 जून 2003 को दिल्ली के सुचेता कृपलानी अस्पताल में हुआ था। तब डॉक्टरों ने कहा था कि ये बच्चे 24 घंटे से ज्यादा जीवित नहीं रहेंगे। माता-पिता द्वारा छोड़े जाने के बाद अमृतसर की पिंगलवाड़ा संस्था की डॉ. इंद्रजीत कौर ने इन्हें अपनाया और माँ जैसा प्यार दिया। आज अपनी अपंगता को अपनी ताकत बनाकर दोनों भाई न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अब एक्टिंग की दुनिया में भी अपनी पहचान बना रहे हैं।


निष्कर्ष:

सोना-मोना का ओटीटी पर आना केवल एक फिल्म का हिस्सा होना नहीं है, बल्कि यह उन लाखों लोगों के लिए उम्मीद की एक किरण है जो अपनी शारीरिक कमियों के कारण समाज से कट जाते हैं। पिंगलवाड़ा की गोद से निकलकर जेई बनने और अब फिल्मी दुनिया तक का उनका यह सफर किसी चमत्कार से कम नहीं है। उनकी यह फिल्म समाज को दिव्यांगता के प्रति एक नया नजरिया देने का काम करेगी।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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