ट्रेन में नॉनवेज परोसने पर बड़ा सवाल: NHRC ने रेलवे को नोटिस भेजा, पूछा– हलाल या झटका?

नई दिल्ली: भारतीय ट्रेनों में परोसे जाने वाले नॉनवेज भोजन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले में रेलवे बोर्ड और पर्यटन मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

NHRC ने सोमवार 12 जनवरी को जारी अपने पत्र में कहा कि रेलवे द्वारा पहले दी गई रिपोर्ट अधूरी और अस्पष्ट है, जिसमें कई अहम सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं दिए गए हैं। आयोग ने साफ किया कि यात्रियों को यह जानने का मौलिक अधिकार है कि उन्हें परोसा जा रहा मांस हलाल है या झटका विधि से तैयार किया गया है।


सिख संगठनों की शिकायत से उठा मामला

यह मामला तब सामने आया जब सिख संगठनों ने NHRC में शिकायत दर्ज कराई कि ट्रेनों में केवल हलाल विधि से तैयार मांस परोसा जाता है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह धार्मिक आधार पर भेदभाव की स्थिति पैदा करता है।

सिख रहत मर्यादा के अनुसार, सिखों को हलाल मांस का सेवन वर्जित है। ऐसे में यात्रियों को बिना जानकारी दिए ऐसा भोजन परोसना उनके धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।


NHRC नोटिस की 4 अहम टिप्पणियां

  1. रेलवे की रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि मांस किस विधि से तैयार किया जाता है।

  2. दारुल उलूम देवबंद के अनुसार, हलाल मांस तभी माना जाता है जब उसका वध मुस्लिम व्यक्ति द्वारा किया गया हो, जिससे अन्य समुदायों के रोजगार पर असर पड़ सकता है।

  3. मांस की तैयारी की विधि सार्वजनिक रूप से बताना जरूरी है।

  4. IRCTC से जुड़े ठेकेदारों और वेंडरों की जानकारी रिपोर्ट में अधूरी है—यह नहीं बताया गया कि कौन हलाल, झटका या दोनों प्रकार का मांस परोसता है।


NHRC ने रेलवे से मांगी 3 प्रमुख जानकारियां

  1. सभी फूड वेंडरों और ठेकेदारों की पूरी सूची

  2. यह स्पष्ट विवरण कि कौन-सा ठेकेदार किस तरह का मांस परोसता है

  3. किन ट्रेनों और स्टेशनों पर यह भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है

इसके साथ ही NHRC ने पूछा है कि इन बिंदुओं को रेलवे की गुणवत्ता और मानक नीति में कैसे शामिल किया जाएगा।


रेलवे का जवाब: हलाल पर कोई आधिकारिक नीति नहीं

रेलवे बोर्ड ने अपनी पिछली रिपोर्ट में कहा था कि भारतीय रेलवे और IRCTC FSSAI नियमों का पालन करते हैं और ट्रेनों में हलाल भोजन को लेकर कोई आधिकारिक नीति या अनिवार्यता नहीं है।

यह मामला पहले मुख्य सूचना आयोग (CIC) के सामने भी उठ चुका है, जहां यह सामने आया कि हलाल भोजन को लेकर किसी तरह की नीति, मंजूरी प्रक्रिया या यात्रियों की सहमति का रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।


पर्यटन मंत्रालय से भी रिपोर्ट तलब

NHRC ने पर्यटन मंत्रालय के सचिव से भी चार सप्ताह में जवाब मांगा है। आयोग ने कहा कि होटल रेटिंग और कैटेगरी के नियमों में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वहां परोसा जाने वाला मांस किस विधि से तैयार किया गया है।


निष्कर्ष:

NHRC का यह नोटिस यात्रियों के धार्मिक अधिकार, पारदर्शिता और उपभोक्ता सूचना के अधिकार से जुड़ा अहम मामला बन गया है। यदि रेलवे और पर्यटन मंत्रालय स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करते हैं, तो भविष्य में यात्रियों को भोजन चुनने की स्वतंत्रता और स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। आने वाले हफ्तों में रेलवे की रिपोर्ट इस मुद्दे की दिशा तय करेगी।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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