डासना जेल के बाहर सैकड़ों समर्थक जमा हुए और इसके बाद करीब 20 किलोमीटर लंबा जुलूस निकाला गया। काफिले में थार, स्कॉर्पियो, फॉरच्यूनर जैसी लग्जरी गाड़ियां शामिल थीं।
जुलूस के दौरान कई युवक चलती कारों की खिड़कियों और सनरूफ से बाहर लटके नजर आए। गाड़ियों की छतों पर रखी आतिशबाजी जलाई गई, हूटर बजते रहे और ट्रैफिक नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई।
इस पूरे काफिले में समर्थक नारे लगा रहे थे—
“देखो-देखो कौन आया, शेर आया… शेर आया!”
रिहाई के बाद पिंकी चौधरी ने चलती कार से वीडियो जारी करते हुए कहा—
“राम…राम, जेल से आ गए हैं। फिर धर्म का काम करेंगे। मेरे साथी मुझे लेकर जा रहे हैं, आप भी देखिए।”
वीडियो में साफ देखा गया कि जिस कार में पिंकी सवार थे, उसकी खिड़की से एक युवक बाहर लटककर वीडियो बना रहा था।
यह काफिला शालीमार गार्डन स्थित हिंदू रक्षा दल के कार्यालय पहुंचा, जहां पिंकी चौधरी ने कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इस दौरान भी सुरक्षा या ट्रैफिक नियंत्रण के ठोस इंतजाम नजर नहीं आए।
पिंकी चौधरी ने घर-घर तलवार बांटने के मामले में जिला अदालत में जमानत याचिका दायर की थी।
14 जनवरी को कोर्ट ने जमानत मंजूर की
15 जनवरी को कागजात जेल पहुंचे
इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया
रिहाई के तुरंत बाद जुलूस और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।
29 सितंबर 2025 को गाजियाबाद के शालीमार गार्डन से एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें हिंदू रक्षा दल के लोग तलवारें और फरसे बांटते दिखे थे।
वीडियो में लोगों से कहा गया—
“ये आपकी बहन-बेटियों की सुरक्षा के लिए हैं। अगर बांग्लादेश जैसी स्थिति बनी तो काम आएंगे।”
6 जनवरी को पुलिस ने पिंकी चौधरी और उनके बेटे को गिरफ्तार किया था।
इस मामले में—
10 आरोपी पहले ही जेल भेजे गए
तलवार लेने वालों को भी हिरासत में लिया गया
एक सोसाइटी गार्ड की पत्नी ने बताया कि—
“मेरे पति सो रहे थे। संगठन के लोग आए, तलवार हाथ में थमा दी। शाम को पुलिस उन्हें ले गई।”
एक अन्य आरोपी के भाई ने कहा—
“भाई दुकान पर खड़ा था, हाथ में तलवार पकड़ा दी गई। पता नहीं था कि इतना बड़ा जुर्म है।”
जेल से रिहाई के बाद हुआ यह शक्ति-प्रदर्शन प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। तलवार जैसे हथियारों के मामलों में नाम आने के बावजूद खुलेआम जुलूस, आतिशबाजी और ट्रैफिक अराजकता यह दर्शाती है कि कानून के डर से ज्यादा प्रभाव सड़कों पर दिखाई दे रहा है। सवाल यह है— क्या नियम सिर्फ आम लोगों के लिए हैं?
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