हाथ पकड़कर जीजा-साली ने ट्रेन के आगे दी जान… 2 साल का प्यार, समाज का डर और एक खौफनाक अंत

उत्तर प्रदेश: के हरदोई जिले से सामने आई यह घटना रिश्तों, समाज और दबाव के बीच टूटते इंसानी हौसलों की दर्दनाक तस्वीर पेश करती है। गुरुवार देर रात करीब 2:15 बजे, घने कोहरे के बीच जीजा और साली ने एक-दूसरे का हाथ थामकर रेलवे ट्रैक पर खड़े होकर ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली।

तेज रफ्तार ट्रेन के गुजरते ही हादसा इतना भयावह था कि मौके पर मौजूद लोगों की रूह कांप गई। रेलवे ट्रैक के आसपास दोनों के शव क्षत-विक्षत अवस्था में पड़े मिले। घटना के बाद करीब 45 मिनट तक ट्रेन को रोका गया, जिसके बाद पुलिस ने शवों को पॉलिथीन में भरकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा।


15 घंटे बाद हुई पहचान, कपड़ों और निशानों से शिनाख्त

घटना के लगभग 15 घंटे बाद परिजन मौके पर पहुंचे। शवों की हालत इतनी खराब थी कि चेहरों से पहचान संभव नहीं थी।
मृतक रितेश सिंह (28) के भाई ने उसके बाएं कान के पीछे मौजूद तिल और कपड़ों से पहचान की, जबकि मुस्कान की मां ने बेटी के कपड़ों के आधार पर उसकी शिनाख्त की।

उस वक्त रेलवे ट्रैक के पास सिर्फ दो शव नहीं थे, बल्कि टूटे हुए सपने, बिखरा परिवार और खामोश सवाल भी मौजूद थे।


हरियाणा में काम करता था रितेश, मुस्कान कर चुकी थी BA

पुलिस जांच में सामने आया कि रितेश सिंह हरियाणा के बहादुरगढ़ स्थित एक फैक्ट्री में काम करता था और अविवाहित था।
मुस्कान बीए पास थी और नौकरी की तलाश में थी।

3 जुलाई 2024 को रितेश के छोटे भाई की शादी मुस्कान की बड़ी बहन से हुई थी। शादी के बाद रितेश का मुस्कान के घर आना-जाना बढ़ा और इसी दौरान दोनों के बीच प्रेम-प्रसंग शुरू हो गया, जो करीब दो साल तक चला।


परिवार को पता चला तो बढ़ा विरोध

जब परिवार को इस रिश्ते की जानकारी हुई तो हालात बदलने लगे।
दोनों के मिलने-जुलने पर पाबंदी लगा दी गई, मुस्कान के लिए दूसरे रिश्ते तलाशे जाने लगे।
सीधी मुलाकात बंद हो गई, लेकिन फोन पर बातचीत जारी रही।

परिजनों के दबाव और समाज के डर ने दोनों को मानसिक रूप से तोड़ दिया। वे खुद को चारों ओर से घिरा हुआ महसूस करने लगे।


13 जनवरी को लौटा था रितेश, उसी दिन लिया फैसला

परिजनों के मुताबिक, रितेश 13 जनवरी को हरियाणा से घर लौटा था।
उसी दिन दोनों ने आत्महत्या का फैसला कर लिया।

बुधवार रात रितेश अपनी बुआ के घर पहुंचा, वहां मोबाइल और बैग छोड़कर यह कहकर निकला कि वह लखनऊ जा रहा है। कुछ देर बाद मुस्कान भी वहां पहुंची। दोनों रेलवे क्रॉसिंग के पास पहुंचे और काफी देर तक साथ बैठे रहे—शायद जिंदगी की आखिरी बातचीत करते हुए।


निष्कर्ष:

हरदोई की यह घटना सिर्फ एक आत्महत्या का मामला नहीं, बल्कि पारिवारिक दबाव, सामाजिक वर्जनाओं और प्रेम की बेबसी की कहानी है।
जब रिश्तों को समझने के बजाय उन्हें कुचलने की कोशिश की जाती है, तो अंजाम अक्सर ऐसा ही दर्दनाक होता है। यह घटना समाज के लिए एक गंभीर सवाल छोड़ जाती है—क्या प्यार आज भी गुनाह है?

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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