नई दिल्ली: भारतीय कमोडिटी बाजार में सोना और चांदी ने नया इतिहास रच दिया है। आज 21 जनवरी को सोने की कीमत पहली बार ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 कैरेट सोना आज ₹7,795 की तेजी के साथ ₹1,55,204 प्रति 10 ग्राम पर खुला। इससे पहले कल इसका भाव ₹1,47,409 था।
इस तरह साल 2026 के सिर्फ 21 दिनों में ही सोना ₹21,744 महंगा हो चुका है। लगातार तीसरे दिन सोने की कीमत अपने ऑलटाइम हाई पर बनी हुई है।
इसी तरह चांदी ने भी जबरदस्त छलांग लगाई है। 1 किलो चांदी की कीमत आज ₹10,730 बढ़कर ₹3,20,075 प्रति किलो पहुंच गई। बीते कारोबारी दिन इसका भाव ₹3,09,345 था। सिर्फ 21 दिनों में ही चांदी ₹90,825 महंगी हो चुकी है।
1. ग्लोबल टेंशन और ग्रीनलैंड विवाद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ग्रीनलैंड को लेकर आक्रामक रुख और यूरोपीय देशों पर टैरिफ की धमकी से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। ट्रेड वॉर की आशंका बढ़ते ही निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश यानी सोने की ओर रुख कर रहे हैं।
2. रुपये की रिकॉर्ड कमजोरी
आज डॉलर के मुकाबले रुपया ₹91.10 के ऑलटाइम लो पर पहुंच गया है। LKP सिक्योरिटीज के कमोडिटी एक्सपर्ट जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, रुपये की कमजोरी से भारत में आयातित सोने की लागत बढ़ गई है, जिससे घरेलू बाजार में सोने की कीमतें ₹1.5 लाख के पार निकल गईं।
3. सेंट्रल बैंकों की भारी खरीदारी
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए लगातार सोने की खरीद कर रहे हैं। 2025 में रिकॉर्ड खरीदारी के बाद 2026 की शुरुआत में भी मांग मजबूत बनी हुई है, जिससे सप्लाई दबाव में है और कीमतें बढ़ रही हैं।
कमोडिटी रिसर्च हेड डॉ. रेनिशा चैनानी के अनुसार, अगर अमेरिकी टैरिफ नीति और मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है, तो 2026 के मध्य तक सोना ₹1.80 लाख से ₹1.90 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को छू सकता है।
पिछले साल यानी 2025 में सोने की कीमत में ₹57,033 यानी करीब 75% की बढ़ोतरी हुई।
31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹76,162 था, जो 31 दिसंबर 2025 तक ₹1,33,195 पर पहुंच गया।
चांदी में और भी तेज उछाल देखने को मिला। इस दौरान चांदी ₹1,44,403 यानी करीब 167% महंगी हुई।
31 दिसंबर 2024 को 1 किलो चांदी ₹86,017 थी, जो 31 दिसंबर 2025 को ₹2,30,420 प्रति किलो हो गई।
1. फिजिकल गोल्ड और सिल्वर
सिक्के या ज्वेलरी के रूप में खरीदारी। हालांकि इसमें स्टोरेज और असली-नकली की पहचान एक चुनौती होती है।
2. गोल्ड और सिल्वर ETF
डीमैट अकाउंट के जरिए निवेश। इसमें स्टोरेज की चिंता नहीं होती और पारदर्शिता ज्यादा रहती है।
1. इंडस्ट्रियल डिमांड
सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों में भारी इस्तेमाल के चलते चांदी अब सिर्फ ज्वेलरी नहीं, बल्कि जरूरी औद्योगिक धातु बन गई है।
2. ट्रम्प का टैरिफ डर
अमेरिका में कंपनियां संभावित टैरिफ से बचने के लिए चांदी का भारी स्टॉक जमा कर रही हैं, जिससे ग्लोबल सप्लाई घट रही है।
3. मैन्युफैक्चरिंग होड़
प्रोडक्शन रुकने के डर से कंपनियां पहले ही खरीदारी कर रही हैं, जिससे कीमतों में तेजी बनी हुई है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के मुताबिक 2026 में चांदी ₹3.20 लाख प्रति किलो तक जा सकती है।
सैमको सिक्योरिटीज का मानना है कि मजबूत तकनीकी संकेतों के आधार पर कीमतें ₹3.94 लाख तक भी पहुंच सकती हैं।
कमोडिटी एक्सपर्ट नीलेश सुराना के अनुसार, ग्रीन एनर्जी की मांग और अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती से चांदी $100 प्रति औंस यानी करीब ₹3.5 से ₹4 लाख प्रति किलो तक जा सकती है।
वहीं ग्लोबल इन्वेस्टर रॉबर्ट कियोसाकी का दावा है कि 2026 में चांदी $200 प्रति औंस के चौंकाने वाले स्तर तक भी पहुंच सकती है।
ग्लोबल तनाव, कमजोर रुपया और सेंट्रल बैंकों की आक्रामक खरीदारी ने सोने और चांदी को ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। मौजूदा हालात में कीमती धातुओं में तेजी का रुझान बरकरार रहने की उम्मीद है। हालांकि निवेशकों को ऊंचे स्तरों पर सावधानी बरतने और गिरावट पर रणनीतिक निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.