भुवनेश्वर और चंडीगढ़: से कांग्रेस पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक हलचल की खबर सामने आई है। कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले तीन विधायकों को पार्टी से निष्कासित कर दिया है।
इस कार्रवाई के साथ ही पार्टी ने इन विधायकों को विधानसभा से अयोग्य घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
ओडिशा में कांग्रेस ने रमेश जेना, दशरथी गोमांगो और सोफिया फिरदौस को पार्टी से बाहर कर दिया है।
इन तीनों पर आरोप है कि उन्होंने राज्यसभा चुनाव में पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर वोटिंग की।
बताया जा रहा है कि इन विधायकों ने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय के पक्ष में मतदान किया, जिससे कांग्रेस और बीजू जनता दल के संयुक्त उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा।
कांग्रेस ने इस मामले को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए विधानसभा स्पीकर को पत्र लिखा है।
पार्टी ने मांग की है कि इन विधायकों को संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल कानून) के तहत अयोग्य घोषित किया जाए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई पार्टी के मूल्यों के खिलाफ है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हरियाणा में भी कांग्रेस के भीतर असंतोष उभर कर सामने आ रहा है।
पार्टी यहां पांच विधायकों को नोटिस देने की तैयारी में है, जिन पर क्रॉस वोटिंग का आरोप है।
इसी बीच हरियाणा कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रामकिशन गुर्जर ने पार्टी छोड़ दी है, जिससे सियासी हलचल और तेज हो गई है।
हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में कई राज्यों में क्रॉस वोटिंग देखने को मिली।
11 सीटों पर हुए चुनाव में 9 सीटें NDA के खाते में गईं, जिससे विपक्ष को झटका लगा।
हरियाणा में राज्यसभा की 2 सीटों के लिए मतदान हुआ था।
इसमें भारतीय जनता पार्टी के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध ने जीत दर्ज की।
वहीं भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को हार का सामना करना पड़ा।
चुनाव में 90 विधायकों में से 83 वोट वैध माने गए, जबकि कुछ वोट रद्द हो गए और कुछ विधायकों ने मतदान नहीं किया।
ओडिशा में भाजपा के मनमोहन सामल और सुजीत कुमार ने जीत हासिल की।
इसके अलावा NDA समर्थित दिलीप राय भी विजयी रहे।
चौथी सीट पर बीजू जनता दल के संत्रुप्ता मिश्रा ने जीत दर्ज की।
कांग्रेस के लिए यह घटनाक्रम एक बड़ी राजनीतिक चुनौती के रूप में सामने आया है।
लगातार क्रॉस वोटिंग की घटनाएं पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और अनुशासन पर सवाल खड़े कर रही हैं।
पार्टी अब सख्त रुख अपनाते हुए अनुशासनहीन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई कर रही है।
आने वाले दिनों में हरियाणा समेत अन्य राज्यों में भी इसी तरह की कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद कांग्रेस की सख्ती यह दर्शाती है कि पार्टी अब अनुशासन को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहती।
हालांकि, अंदरूनी असंतोष और बगावत की स्थिति पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
अब देखना होगा कि कांग्रेस इस संकट से कैसे निपटती है और आगामी चुनावों पर इसका क्या असर पड़ता है।
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