राजस्थान: में गर्मी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए राज्य सरकार ने पेयजल संकट से निपटने के लिए बड़े स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जलदाय विभाग को सख्त निर्देश देते हुए सभी फील्ड अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी हैं। यह कदम प्रदेशभर में शुद्ध और पर्याप्त पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सरकार ने साफ कर दिया है कि इस बार गर्मी के मौसम में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके तहत राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर तक नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) स्थापित किए गए हैं, जहां से पेयजल आपूर्ति की लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी और शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
राज्य सरकार ने 41 जिलों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बड़ा बजट जारी किया है। शहरी क्षेत्रों के लिए 55.88 करोड़ रुपए और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 154.83 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। इस फंड का उपयोग पाइपलाइन सुधार, लीकेज रोकने, जल स्रोतों के रखरखाव और वैकल्पिक व्यवस्थाओं के लिए किया जाएगा।
इसके अलावा, 1 अप्रैल से 31 जुलाई 2026 तक टैंकरों के माध्यम से जल आपूर्ति के लिए अलग से बजट जारी किया गया है। शहरी क्षेत्रों के लिए 23 करोड़ रुपए और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 82.37 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं। इससे उन इलाकों में राहत मिलेगी जहां जल स्रोत सीमित हैं या सप्लाई बाधित होने की संभावना है।
पेयजल आपूर्ति की निगरानी के लिए सरकार ने अतिरिक्त मानव संसाधन और वाहनों की व्यवस्था भी की है। मार्च महीने के लिए 500 श्रमिक और 100 किराए के वाहन स्वीकृत किए गए हैं। अप्रैल में यह संख्या बढ़ाकर 2000 श्रमिक और 400 वाहन कर दी जाएगी, जबकि मई से जुलाई के बीच 2500 श्रमिक और 450 वाहन तैनात किए जाएंगे।
यह व्यवस्था इस बात को सुनिश्चित करेगी कि हर क्षेत्र में पानी की सप्लाई समय पर और सुचारू रूप से होती रहे।
सरकार ने जल आपूर्ति से जुड़े आपातकालीन कार्यों के लिए प्रत्येक जिले को 1-1 करोड़ रुपए खर्च करने की अनुमति भी दी है। जिला कलेक्टर की अनुशंसा पर अतिरिक्त मुख्य अभियंता तुरंत आवश्यक कार्यों को पूरा कर सकेंगे।
इसके साथ ही, जल जीवन मिशन के तहत पूर्ण हो चुकी योजनाओं के संचालन के लिए प्रत्येक जिले को 25-25 लाख रुपए दिए गए हैं, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की सप्लाई बिना किसी बाधा के जारी रहे।
सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि सभी फील्ड अधिकारियों की मौके पर उपस्थिति अनिवार्य होगी। छुट्टियों पर पूरी तरह रोक लगाई गई है और केवल अत्यंत जरूरी स्थिति में ही उच्च स्तर की अनुमति से अवकाश दिया जाएगा।
यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि किसी भी क्षेत्र में पानी की समस्या उत्पन्न होने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके और आमजन को परेशानी का सामना न करना पड़े।
राजस्थान में हर साल गर्मियों के दौरान कई इलाकों में जल संकट गहराता है। इस बार सरकार ने पहले से ही सक्रियता दिखाते हुए व्यापक योजना लागू की है, जिससे संभावित संकट को टाला जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते की गई यह तैयारी प्रदेश के लाखों लोगों को राहत दे सकती है और पानी की कमी से होने वाली परेशानियों को काफी हद तक कम कर सकती है।
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