जयपुर: सहित पूरे राजस्थान में इस बार ईद का माहौल सामान्य खुशी से अलग नजर आया। जहां एक ओर मुस्लिम समुदाय ने काली पट्टियां बांधकर नमाज अदा की और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के विरोध में प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल भी देखने को मिली।
राज्य के जयपुर, सीकर, अजमेर और अन्य जिलों में ईद के मौके पर कई जगहों पर अमेरिका और इजराइल के खिलाफ नारेबाजी हुई। मस्जिदों पर काले झंडे लगाए गए और लोगों ने इस दिन को जश्न की बजाय “मातम” के रूप में मनाया।
जयपुर के आमेर इलाके में शिया और सुन्नी समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए। महिलाओं और बच्चों ने भी रैली में हिस्सा लिया।
सुभाष चौक स्थित जामा मस्जिद पर भी काले झंडे लगाए गए, जो इस विरोध का प्रतीक बने।
अजमेर के दौराई क्षेत्र के इमाम-ए-जुमा मौलाना सैय्यद तकी जाफर ने कहा कि इस बार समुदाय शोक में है।
उनके अनुसार:
उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं और धार्मिक नेतृत्व से जुड़े घटनाक्रमों के कारण समुदाय दुख में है।
हालांकि विरोध के बीच ईद की नमाज पूरी शांति के साथ अदा की गई।
जयपुर में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली, जिसने माहौल को सकारात्मक बनाया।
हिंदू मुस्लिम सामाजिक एकता समिति के सदस्यों ने बताया कि यह परंपरा हर साल निभाई जाती है और भाईचारे को मजबूत करने का प्रतीक है।
अजमेर शरीफ दरगाह में ईद के मौके पर एक विशेष परंपरा निभाई गई।
यह दरवाजा साल में खास मौकों पर ही खोला जाता है, जिसे बेहद पवित्र माना जाता है।
राज्य के कई शहरों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए।
राजनीतिक नेताओं ने भी ईद के मौके पर लोगों को बधाई दी और शांति बनाए रखने की अपील की।
कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा ने ईदगाह पहुंचकर लोगों को मुबारकबाद दी और प्रदेश में सौहार्द बनाए रखने की कामना की।
जयपुर और पूरे राजस्थान में इस बार ईद कई मायनों में अलग रही। जहां एक ओर विरोध और मातम का माहौल था, वहीं दूसरी ओर भाईचारे और एकता की मिसाल भी सामने आई।
यह दिन दिखाता है कि भले ही विचारों में मतभेद हों, लेकिन समाज में सौहार्द और आपसी सम्मान की भावना अब भी मजबूत है।
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