कोलकाता: में ईद के मौके पर आयोजित नमाज के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर राजनीतिक मोर्चे पर अपनी सख्त मौजूदगी दर्ज कराई।
ईदगाह में लोगों को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने जहां एक ओर राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।
अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी समुदाय मिलकर रहते हैं और यही राज्य की पहचान है।
उन्होंने स्पष्ट कहा:
यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में ईद के दौरान विरोध और संवेदनशील स्थितियां देखने को मिल रही हैं।

ममता बनर्जी ने अपने भाषण में सीधे तौर पर नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि:
उनके इस बयान को आगामी राजनीतिक रणनीति और केंद्र-राज्य टकराव के संदर्भ में देखा जा रहा है।
राजनीतिक हमलों के बावजूद ममता बनर्जी ने अपने भाषण में एकता और भाईचारे पर जोर दिया।
ईदगाह में मौजूद लोगों ने भी उनके संदेश का समर्थन किया और एकजुटता दिखाई।
विशेषज्ञों के अनुसार, ममता बनर्जी का यह बयान केवल एक धार्मिक मंच से दिया गया संदेश नहीं, बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक संकेत भी है।
यह बयान पश्चिम बंगाल की राजनीति में आने वाले समय में और हलचल पैदा कर सकता है।
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