देश: की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद Sanjay Raut ने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अब वे देश चलाने के काबिल नहीं हैं और उन्हें “झोला उठाकर चले जाना चाहिए”।
दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राउत ने कहा कि भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है, लेकिन सरकार इस पर ध्यान देने के बजाय चुनावी अभियानों में व्यस्त है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “रुपया गिर रहा है और प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं।”
Sanjay Raut ने दावा किया कि रुपये की गिरावट का सिलसिला उसी समय से शुरू हुआ जब Narendra Modi प्रधानमंत्री बने। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में रुपया “100 के पार” जाने की ओर बढ़ रहा है, जो देश की आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री पहले कहा करते थे कि रुपये की गिरावट देश की प्रतिष्ठा से जुड़ी होती है, ऐसे में अब सरकार को जवाब देना चाहिए।
राउत ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पश्चिम बंगाल में राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त हैं। उन्होंने Mamata Banerjee का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र सरकार वहां “खेला” करने की कोशिश कर रही है, जबकि देश की आर्थिक स्थिति पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
एक दिन पहले कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi ने भी रुपये की गिरावट और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला था। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि रुपया डॉलर के मुकाबले 100 के स्तर की ओर बढ़ रहा है, जो आने वाली महंगाई का संकेत है।
राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि उत्पादन और परिवहन महंगे होंगे, जिससे MSMEs को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो जाएंगी।
Rahul Gandhi ने यह भी कहा कि विदेशी निवेशक (FII) भारत से पैसा निकाल सकते हैं, जिससे शेयर बाजार पर दबाव बढ़ेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार के दावों के बजाय आम जनता की थाली में क्या बच रहा है, यही असली मुद्दा है।
इस बीच, तेल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में ₹2.09 से ₹2.35 प्रति लीटर तक बढ़ोतरी की है। इसके अलावा औद्योगिक ईंधन की कीमतों में भी करीब 25% की वृद्धि दर्ज की गई है।
Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum जैसी कंपनियों ने अपने-अपने प्रीमियम फ्यूल के दाम बढ़ाए हैं। इसका असर उद्योगों, परिवहन और सेवाओं पर पड़ना तय माना जा रहा है।
20 मार्च को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.53 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल इसका प्रमुख कारण है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति स्थिर नहीं होती, तो रुपये पर दबाव बना रह सकता है।
इस पूरे मुद्दे ने एक बार फिर यह दिखाया है कि आर्थिक चुनौतियां और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप साथ-साथ चल रहे हैं। जहां विपक्ष सरकार को घेरने में लगा है, वहीं सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
Sanjay Raut के तीखे बयान और Rahul Gandhi के आर्थिक मुद्दों पर हमले से साफ है कि आने वाले समय में महंगाई और रुपये की स्थिति राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बनने वाली है। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार इन चुनौतियों से कैसे निपटती है और विपक्ष के आरोपों का क्या जवाब देती है।
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