रामगंज में दिखी गंगा-जमुनी तहज़ीब: रामनवमी शोभायात्रा पर मुस्लिम समाज की पुष्पवर्षा, दिल छू लेने वाली तस्वीरें

जयपुर: के रामगंज क्षेत्र में इस बार रामनवमी का पर्व सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं रहा, बल्कि सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की एक मिसाल बनकर सामने आया। श्रीरामनवमी के अवसर पर निकाली गई भव्य शोभायात्रा का मुस्लिम समाज द्वारा पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया, जिसने पूरे शहर में सकारात्मक संदेश फैलाया।

यह पहल ‘वर्क राजस्थान चेप्टर’ की ओर से की गई, जिसमें मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शोभायात्रा जैसे ही रामगंज क्षेत्र से गुजरी, स्थानीय मुस्लिम भाई-बहनों ने फूल बरसाकर श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया। इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों के दिलों को छू लिया और माहौल को पूरी तरह से सौहार्दपूर्ण बना दिया।

कार्यक्रम के दौरान संस्था के प्रवक्ता क़ाज़ी सैयद असगर अली ने कहा कि भगवान श्रीराम केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति के आदर्श पुरुष हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन सत्य, त्याग, मर्यादा और न्याय का प्रतीक है, जो हर समाज के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने अपने संबोधन में एक शेर भी पढ़ा—
"है राम के वजूद पर हिंदुस्तान को नाज़,
अहले नज़र समझते हैं उनको इमाम-ए-हिंद।"

उनके इस बयान ने कार्यक्रम को और भी भावनात्मक बना दिया और वहां मौजूद लोगों ने जोरदार तालियों से उनका स्वागत किया।

इस आयोजन की खास बात यह रही कि इसमें महिलाओं की भागीदारी भी काफी सक्रिय रही। वर्क टीम की महिला सदस्यों ने न केवल आयोजन में सहयोग दिया, बल्कि समाज में एकता और समरसता का संदेश भी दिया। उन्होंने यह साबित किया कि सामाजिक बदलाव में महिलाओं की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है।

वर्क राजस्थान चेप्टर के प्रमुख लाइक हसन ने कहा कि सभी धर्मों और समाजों को मिल-जुलकर महापुरुषों की जयंती मनानी चाहिए। इससे आपसी समझ और विश्वास मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में फैली गलतफहमियां दूर होती हैं और लोग एक-दूसरे के करीब आते हैं।

इस कार्यक्रम में डॉक्टर तस्लीम, डॉक्टर मलिका, यूसुफ खान, एडवोकेट अफजल, एडवोकेट मोहम्मद फरजान, रुबीना तबस्सुम और जोंटी भाई सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना की और इसे समाज के लिए एक सकारात्मक कदम बताया।

रामगंज जैसे संवेदनशील माने जाने वाले क्षेत्र में इस तरह का आयोजन होना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। यह दिखाता है कि अगर समाज के लोग मिलकर प्रयास करें, तो किसी भी तरह की दूरी को खत्म किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन न केवल सामाजिक एकता को बढ़ावा देते हैं, बल्कि युवाओं के लिए भी एक सकारात्मक संदेश छोड़ते हैं। आज के समय में जब छोटी-छोटी बातों पर समाज में तनाव की स्थिति बन जाती है, ऐसे उदाहरण उम्मीद की किरण बनकर सामने आते हैं।

सोशल मीडिया पर भी इस आयोजन की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। लोग इसे ‘असली भारत की तस्वीर’ बता रहे हैं और इस पहल की जमकर तारीफ कर रहे हैं।


निष्कर्ष:

रामगंज में रामनवमी शोभायात्रा पर मुस्लिम समाज द्वारा किया गया स्वागत केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सद्भाव का जीवंत उदाहरण है। यह संदेश देता है कि विविधताओं के बावजूद भारत की असली ताकत उसकी एकता में ही है।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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