टेक्सटाइल इंडस्ट्री: के दिग्गज और रेमंड ग्रुप के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का शनिवार शाम को निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे। रविवार, 29 मार्च को मुंबई में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां उनके बेटे और कंपनी के मौजूदा चेयरमैन गौतम सिंघानिया ने उन्हें मुखाग्नि दी।
मुंबई के चंदनवाड़ी श्मशान घाट पर दोपहर करीब 3 बजे अंतिम संस्कार की रस्में पूरी हुईं। इस दौरान परिवार के सदस्य और करीबी लोग मौजूद रहे। विजयपत सिंघानिया अपने पीछे पत्नी आशादेवी और तीन बच्चों—मधुपति सिंघानिया, शेफाली रुइया और गौतम सिंघानिया को छोड़ गए हैं।
विजयपत सिंघानिया ने 1980 में रेमंड की कमान संभाली और इसे एक छोटे टेक्सटाइल व्यवसाय से एक बड़े औद्योगिक समूह में बदल दिया। उनके नेतृत्व में कंपनी ने देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई।
रेमंड की शुरुआत 1925 में हुई थी, लेकिन विजयपत के समय में इसे नई ऊंचाइयां मिलीं। उन्होंने 1986 में ‘पार्क एवेन्यू’ जैसे प्रीमियम ब्रांड लॉन्च किए, जो भारतीय पुरुषों के फैशन में बड़ा बदलाव लेकर आए। 1990 में ओमान में पहला इंटरनेशनल शोरूम खोलकर उन्होंने कंपनी को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया।
विजयपत सिंघानिया सिर्फ एक सफल उद्योगपति ही नहीं, बल्कि एडवेंचर के शौकीन भी थे। उन्हें उड़ान भरने का बेहद शौक था और उन्होंने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं।
1988 में उन्होंने माइक्रोलाइट विमान से लंदन से नई दिल्ली तक अकेले उड़ान भरकर रिकॉर्ड बनाया। इसके अलावा 2005 में 67 साल की उम्र में हॉट एयर बैलून से करीब 69,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंचकर वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया।
उनके इस जुनून और योगदान के लिए उन्हें ‘तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड’ से भी सम्मानित किया गया। 2006 में उन्हें भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से नवाजा गया।
विजयपत सिंघानिया को उद्योग, समाज और एडवेंचर के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए कई सम्मान मिले। भारतीय वायुसेना ने उन्हें ‘मानद एयर कमोडोर’ की उपाधि दी थी। साथ ही, वे 2006 में मुंबई के ‘शेरिफ’ भी नियुक्त किए गए थे।
उन्होंने अपनी जिंदगी के अनुभवों को ‘एन एंजल इन ए कॉकपिट’ नामक किताब में भी साझा किया।
अपने जीवन के अंतिम वर्षों में विजयपत सिंघानिया अपने बेटे गौतम सिंघानिया के साथ संपत्ति विवाद को लेकर चर्चा में रहे। 2015 में कंपनी की कमान बेटे को सौंपने के बाद दोनों के बीच रिश्तों में खटास आ गई।
2017 में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें अपने ही घर ‘जेके हाउस’ से बाहर कर दिया गया। इस विवाद ने मीडिया में काफी सुर्खियां बटोरी थीं। हालांकि मार्च 2024 में दोनों के बीच सुलह की खबरें भी आईं, लेकिन बाद में विजयपत ने इन अटकलों को खारिज कर दिया था।
विजयपत सिंघानिया ने अपने जीवन में जो मुकाम हासिल किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने रेमंड को एक भरोसेमंद ब्रांड बनाया और भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री को नई पहचान दी।
उनके बेटे गौतम सिंघानिया ने उन्हें एक दूरदर्शी नेता और प्रेरणादायक व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि उनकी विरासत हमेशा जिंदा रहेगी।
विजयपत सिंघानिया का जीवन सिर्फ एक उद्योगपति की कहानी नहीं, बल्कि जुनून, साहस और संघर्ष की मिसाल है। उन्होंने व्यापार और एडवेंचर दोनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई। उनका निधन देश के औद्योगिक जगत के लिए एक बड़ी क्षति है।
All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.