राजस्थान: क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है। भजनलाल शर्मा सरकार ने एडहॉक कमेटी के कन्वीनर को बदलते हुए दीनदयाल कुमावत को हटा दिया है और उनकी जगह भाजपा विधायक जसवंत यादव के बेटे मोहित यादव को नया कन्वीनर नियुक्त किया है।
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पिछले दो वर्षों से RCA के चुनाव लंबित हैं और सरकार लगातार एडहॉक कमेटी का कार्यकाल बढ़ाती जा रही है। यह अब तक 9वीं बार है जब इस कमेटी की अवधि को बढ़ाया गया है।
नई एडहॉक कमेटी में कई नए चेहरों को शामिल किया गया है। इनमें पूर्व मंत्री चंद्रराज सिंघवी के पोते अरिष्ट सिंघवी और भादरा (हनुमानगढ़) से विधायक संजीव बेनीवाल के बेटे अर्जुन बेनीवाल को सदस्य बनाया गया है।
वहीं, कुछ पुराने सदस्यों को भी बरकरार रखा गया है। इनमें स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे धनंजय सिंह खींवसर और भाजपा सांसद घनश्याम तिवाड़ी के बेटे आशीष तिवाड़ी शामिल हैं।
हालांकि, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता पिंकेश जैन को इस बार कमेटी से बाहर कर दिया गया है, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
दरअसल, RCA की निर्वाचित कार्यकारिणी को भंग करने के बाद से राज्य सरकार एडहॉक कमेटी के जरिए ही संघ का संचालन कर रही है। मार्च 2024 में पहली बार यह कमेटी बनाई गई थी, जिसके बाद लगातार इसका कार्यकाल बढ़ाया जा रहा है।
जून 2025 में दीनदयाल कुमावत को कन्वीनर बनाया गया था, लेकिन अब उन्हें हटाकर मोहित यादव को जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इस फैसले को प्रशासनिक पुनर्गठन के तौर पर देखा जा रहा है।
सरकार द्वारा गठित नई एडहॉक कमेटी का कार्यकाल 3 महीने के लिए तय किया गया है। इस दौरान सबसे अहम जिम्मेदारी RCA के लंबित चुनाव करवाने की होगी।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस बार भी चुनाव नहीं हो पाते हैं, तो मामला एक बार फिर कोर्ट तक पहुंच सकता है।
कमेटी में नेताओं के बेटों को शामिल किए जाने को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष इसे “परिवारवाद” और “राजनीतिक हस्तक्षेप” बता रहा है, जबकि सरकार इसे प्रशासनिक आवश्यकता और अनुभव का मिश्रण बता रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, RCA केवल एक खेल संस्था नहीं, बल्कि राजस्थान की राजनीति का भी अहम हिस्सा बन चुकी है, जहां फैसलों के पीछे राजनीतिक समीकरण भी काम करते हैं।
RCA में लगातार हो रहे बदलावों का असर राज्य के क्रिकेट प्रशासन पर भी पड़ रहा है। कई खिलाड़ी और जिला क्रिकेट संघ लंबे समय से चुनाव की मांग कर रहे हैं, ताकि एक स्थायी और निर्वाचित निकाय काम संभाल सके।
एडहॉक कमेटी के जरिए लंबे समय तक संचालन होने से पारदर्शिता और निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल उठते रहे हैं।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या नई कमेटी अपने 3 महीने के कार्यकाल में चुनाव करा पाएगी या फिर एक बार फिर कार्यकाल बढ़ाने की नौबत आएगी।
अगर चुनाव समय पर नहीं हुए, तो RCA का यह विवाद और गहरा सकता है और कानूनी लड़ाई तेज हो सकती है।
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