पश्चिम एशिया: में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंचता नजर आ रहा है। ताजा घटनाक्रम में ईरान की ओर से कुवैत के एक पावर प्लांट पर किए गए हमले ने हालात को और गंभीर बना दिया है। इस हमले में एक भारतीय मजदूर की मौत हो गई, जिससे भारत समेत कई देशों में चिंता बढ़ गई है।
कुवैत के बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, रविवार शाम एक बड़े पावर और डीसैलिनेशन प्लांट की सर्विस बिल्डिंग को निशाना बनाया गया। यह प्लांट समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने के साथ-साथ बिजली उत्पादन का भी काम करता है।
हमले के दौरान वहां काम कर रहे एक भारतीय कर्मचारी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि इमारत को भारी नुकसान पहुंचा। यह घटना विदेशी कामगारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है, जो बड़ी संख्या में खाड़ी देशों में काम करते हैं।
हमले के तुरंत बाद कुवैती प्रशासन ने तकनीकी और इमरजेंसी टीमों को मौके पर भेजा। इन टीमों ने हालात को नियंत्रण में लेने और बिजली-पानी की आपूर्ति को बनाए रखने के लिए काम शुरू कर दिया।
सरकार ने नागरिकों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है। साथ ही आश्वासन दिया गया है कि जरूरी सेवाओं में किसी तरह की बाधा नहीं आने दी जाएगी।
इस बीच लेबनान में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। दक्षिणी क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन यूएनआईएफआईएल के ठिकाने पर एक प्रोजेक्टाइल गिरने से एक शांति सैनिक की मौत हो गई, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया।
यूएनआईएफआईएल ने घटना की जांच शुरू कर दी है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। संगठन ने स्पष्ट कहा है कि शांति सैनिकों पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और इसे युद्ध अपराध माना जा सकता है।
वहीं इस्राइल की सेना आईडीएफ ने दावा किया है कि उसने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्ला के कई लड़ाकों को मार गिराया।
आईडीएफ के मुताबिक, ये लड़ाके इस्राइली सैनिकों पर हमले की तैयारी कर रहे थे और उनके पास भारी मात्रा में हथियार मौजूद थे, जिनमें एंटी-टैंक मिसाइल, मोर्टार और ग्रेनेड शामिल थे।
इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है, जिससे बड़े संघर्ष की आशंका भी जताई जा रही है।
कुवैत में हुए हमले में भारतीय नागरिक की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पश्चिम एशिया में काम कर रहे लाखों विदेशी मजदूर कितने सुरक्षित हैं।
भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और फिलीपींस जैसे देशों के नागरिक बड़ी संख्या में खाड़ी देशों में काम करते हैं। ऐसे में किसी भी सैन्य तनाव का सबसे बड़ा असर इन्हीं पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान, कुवैत, लेबनान और इस्राइल के बीच बढ़ती घटनाएं एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का संकेत हो सकती हैं।
हालांकि अभी तक किसी देश ने औपचारिक युद्ध की घोषणा नहीं की है, लेकिन लगातार हो रही सैन्य गतिविधियां और हमले स्थिति को बेहद संवेदनशील बना रहे हैं।
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव वैश्विक चिंता का विषय बनता जा रहा है। कुवैत में हुए हमले और लेबनान-इस्राइल के बीच बढ़ते टकराव से यह साफ है कि स्थिति किसी भी समय और गंभीर रूप ले सकती है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह हस्तक्षेप कर हालात को नियंत्रण में लाने की कोशिश करे।
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