देश: के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल तेजी से गरमाता जा रहा है। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने केरल और असम के लिए अपने-अपने घोषणापत्र जारी कर बड़े चुनावी वादों का ऐलान किया है। जहां केरल में विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर जोर दिया गया है, वहीं असम में सुरक्षा, घुसपैठ और जमीन जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई है।
तिरुवनंतपुरम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने पार्टी का घोषणापत्र जारी किया। इस मौके पर पार्टी ने केरल के लिए कई बड़े वादे किए।
सबसे प्रमुख घोषणा राज्य में AIIMS की स्थापना की रही, जो स्वास्थ्य सुविधाओं को नई दिशा देने का दावा करती है। इसके अलावा तिरुवनंतपुरम से कन्नूर तक हाई-स्पीड रेलवे नेटवर्क विकसित करने की योजना भी पेश की गई।
महिलाओं और बुजुर्गों के लिए भी पार्टी ने बड़े वादे किए हैं। जरूरतमंद महिलाओं को ‘भक्ष्य आरोग्य सुरक्षा कार्ड’ देने का प्रस्ताव है, जिसके तहत हर महीने ₹2500 दवाइयों और राशन के लिए दिए जाएंगे। वहीं 70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों, विधवाओं और जरूरतमंद महिलाओं को ₹3000 मासिक पेंशन देने की घोषणा की गई है।
इसके साथ ही गरीब परिवारों को साल में दो मुफ्त LPG सिलेंडर (ओणम और क्रिसमस पर) देने और हर घर को हर महीने 20 हजार लीटर मुफ्त पानी उपलब्ध कराने का वादा भी शामिल है।
असम में भाजपा ने अपने ‘संकल्प पत्र’ में 31 बड़े वादे किए हैं। इसमें सबसे चर्चित मुद्दा घुसपैठियों द्वारा कब्जाई गई जमीन को वापस लेने का है। साथ ही ‘लव जिहाद’ के खिलाफ कड़े कदम और यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की बात कही गई है।
राज्य के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि घुसपैठ एक निरंतर चुनौती है और इससे निपटने के लिए लगातार प्रयास जारी रहेंगे। पार्टी ने युवाओं को अगले 5 साल में 2 लाख नौकरियां देने का भी वादा किया है।
कांग्रेस ने भी असम और केरल में अपने वादों के जरिए भाजपा को चुनौती दी है। राहुल गांधी ने केरल में कहा कि उनकी सरकार बनने पर बुजुर्गों को ₹3000 पेंशन दी जाएगी और युवाओं को ₹5 लाख तक का ब्याज-मुक्त लोन मिलेगा।
इसके अलावा हर परिवार को ₹25 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा देने की योजना भी सामने रखी गई है। कांग्रेस ने महिलाओं और युवाओं को केंद्र में रखकर अपनी रणनीति तैयार की है।
चुनावी माहौल के बीच अन्य राज्यों में भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं।
केरल में भाजपा जहां UDF और LDF पर विकास में बाधा डालने का आरोप लगा रही है, वहीं विपक्ष भाजपा के वादों को ‘चुनावी जुमला’ बता रहा है। असम में भी जमीन और घुसपैठ का मुद्दा चुनावी बहस का केंद्र बन चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार चुनावों में विकास, कल्याण योजनाएं और पहचान की राजनीति तीनों ही बड़े मुद्दे बनकर उभरेंगे।
केरल और असम के घोषणापत्र यह दिखाते हैं कि राजनीतिक दल अब अलग-अलग राज्यों की प्राथमिकताओं के अनुसार अपनी रणनीति बना रहे हैं। जहां एक ओर विकास और सामाजिक सुरक्षा पर जोर है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा और पहचान के मुद्दों को भी प्रमुखता दी जा रही है। आने वाले चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता इन वादों पर कितना भरोसा करती है।
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