मालदा में 7 चुनाव अधिकारी बंधक, सुप्रीम कोर्ट सख्त—“हमें पता है उपद्रवी कौन”, वोटर लिस्ट विवाद से भड़की हिंसा

पश्चिम बंगाल: के मालदा जिले में चुनावी प्रक्रिया के दौरान हिंसा और अव्यवस्था का बड़ा मामला सामने आया है। वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के विरोध में भड़के प्रदर्शनकारियों ने 7 इलेक्शन ऑब्जर्वर्स को करीब 9 घंटे तक बंधक बना लिया। इस घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है और राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह घटना “सोची-समझी और भड़काऊ” प्रतीत होती है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा—“हमें पता है कि उपद्रवी कौन हैं। उनका मकसद न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराना और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करना है।”

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद

यह पूरा मामला स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसके तहत मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जा रहा है। आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बिना उचित सूचना के हजारों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए।

मालदा के 100 से ज्यादा गांव इस विवाद से प्रभावित बताए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई गांवों में 50 से 400 तक नाम हटाए गए, जिससे व्यापक असंतोष फैल गया।

घटना का टाइमलाइन: 6 पॉइंट में समझें

  1. सुबह 10 बजे: छोटे-छोटे समूहों में लोग इकट्ठा होकर BDO ऑफिस के पास विरोध करने लगे।
  2. दोपहर 2 बजे: 7 इलेक्शन ऑब्जर्वर्स (3 महिलाएं शामिल) माताबारी स्थित BDO ऑफिस पहुंचे।
  3. शाम 6 बजे: हजारों प्रदर्शनकारी ऑफिस के बाहर जमा हो गए।
  4. शाम 7 बजे: भीड़ ने ऑफिस का घेराव कर अधिकारियों को बाहर निकलने से रोक दिया।
  5. रात 11 बजे: पुलिस सुरक्षा में अधिकारियों को बाहर निकाला गया, रास्ते में रोका गया।
  6. रात 12 बजे: अधिकारियों की गाड़ियों पर पथराव और तोड़फोड़ की गई।

कोर्ट ने इस दौरान यह भी कहा कि अधिकारियों को खाना-पानी तक नहीं दिया गया, जो बेहद गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि “रात 11 बजे तक कलेक्टर मौके पर नहीं पहुंचा, जो बेहद चिंताजनक है।” कोर्ट ने राज्य के गृह सचिव और DGP से जवाब मांगा है।

कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि “हमने कभी इतना ध्रुवीकृत राज्य नहीं देखा, जहां हर मुद्दे में राजनीति घुस जाती है।” यह बयान राज्य की मौजूदा स्थिति पर गंभीर टिप्पणी माना जा रहा है।

दूसरे दिन भी जारी रहा बवाल

गुरुवार को भी मालदा में प्रदर्शन जारी रहा। नारायणपुर इलाके में सीमा सुरक्षा बल (BSF) कैंप के सामने भारी भीड़ जमा हो गई। प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-12 को जाम कर दिया और सड़क पर टायर जलाकर विरोध जताया।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज

इस घटना को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। ममता बनर्जी की पार्टी TMC ने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि भाजपा ने इसे “जंगल राज” करार दिया है।

भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है, जबकि TMC का आरोप है कि बाहरी अधिकारियों की वजह से हालात बिगड़े।

SIR प्रक्रिया और विवाद

पश्चिम बंगाल में SIR के तहत करीब 7.04 करोड़ मतदाताओं की सूची जारी की गई थी, जिसमें लगभग 60 लाख नाम जांच के दायरे में रखे गए। इन मामलों की समीक्षा के लिए 700 से ज्यादा न्यायिक अधिकारियों को नियुक्त किया गया है।

नाम हटाए जाने के पीछे दस्तावेजों की कमी, तकनीकी त्रुटियां और स्थायी निवास से जुड़ी समस्याएं बताई जा रही हैं। हालांकि, स्थानीय लोग इसे मनमाना और पक्षपातपूर्ण कदम बता रहे हैं।


निष्कर्ष:

मालदा की घटना ने चुनावी प्रक्रिया और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब यह देखना अहम होगा कि राज्य प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या हालात जल्द सामान्य हो पाते हैं।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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