जयपुर: Rajasthan University एक बार फिर विवादों में घिर गई है। इस बार मामला विश्वविद्यालय परिसर में प्रस्तावित Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) के कार्यक्रम को लेकर है, जिसका विरोध छात्र संगठन National Students' Union of India (NSUI) ने खुलकर करने का ऐलान किया है।
गुरुवार को NSUI पदाधिकारियों ने यूनिवर्सिटी कैंपस में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस कार्यक्रम पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मानविकी पीठ में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम धार्मिक प्रकृति का है, जिससे विश्वविद्यालय का शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो सकता है। संगठन का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह के आयोजनों से पढ़ाई का माहौल बिगड़ता है और छात्रों के बीच वैचारिक टकराव बढ़ता है।
NSUI नेताओं ने साफ कहा कि विश्वविद्यालय ज्ञान और शोध का केंद्र होता है, न कि किसी विशेष विचारधारा या धार्मिक गतिविधियों का मंच। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति पर आरोप लगाया कि वे इस तरह के कार्यक्रमों को बढ़ावा दे रहे हैं, जो कैंपस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।
NSUI इकाई के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर यह कार्यक्रम आयोजित किया जाता है, तो बड़ी संख्या में कार्यकर्ता इसका विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि संगठन शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करेगा, लेकिन जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
इससे पहले भी यूनिवर्सिटी में इसी तरह के एक कार्यक्रम को लेकर विवाद हो चुका है। NSUI के अनुसार, पहले हुए “शस्त्र पूजन” कार्यक्रम के दौरान विरोध इतना बढ़ गया था कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और कई छात्रों को गिरफ्तार किया गया था। ऐसे में इस बार भी हालात बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। प्रशासन की चुप्पी से यह सवाल उठ रहा है कि क्या कार्यक्रम को अनुमति दी जाएगी या संभावित विवाद को देखते हुए इसे रद्द किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि देशभर के विश्वविद्यालयों में छात्र राजनीति और वैचारिक टकराव लगातार बढ़ रहा है। एक ओर कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा मानते हैं, वहीं दूसरी ओर कई छात्र संगठन इसे शैक्षणिक वातावरण के लिए नुकसानदायक बताते हैं।
जयपुर की यह घटना भी उसी व्यापक बहस का हिस्सा बनती जा रही है, जहां शिक्षा संस्थानों की भूमिका और सीमाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि विश्वविद्यालय प्रशासन क्या फैसला लेता है। अगर कार्यक्रम होता है, तो कैंपस में तनाव बढ़ सकता है और विरोध प्रदर्शन तेज हो सकते हैं।
राजस्थान यूनिवर्सिटी में RSS कार्यक्रम को लेकर खड़ा हुआ विवाद केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा संस्थानों में विचारधाराओं के टकराव का बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्मा सकता है।
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