राजस्थान: के दौसा जिले में साल 2019 में हुई एक बड़ी लूट की घटना का आखिरकार पुलिस ने खुलासा कर दिया है। करीब 7 साल बाद इस मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी ने पूरे केस को फिर से चर्चा में ला दिया है। यह मामला उस समय का है जब बदमाशों ने फिल्मी अंदाज में एक ट्रक को घेरकर 50 लाख रुपए का सरसों तेल लूट लिया था।
यह कार्रवाई दौसा कोतवाली थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने की। लंबे समय से फरार चल रहे दो आरोपियों—भैरू सिंह और सुंदरलाल—को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों आरोपी अलवर जिले के सिराबास गांव के निवासी बताए जा रहे हैं। पुलिस ने इन दोनों पर पहले से 10-10 हजार रुपए का इनाम भी घोषित कर रखा था।
घटना 18 जुलाई 2019 की है। झारखंड के गिरिडीह जिले के निवासी ट्रक ड्राइवर महेंद्र यादव ने इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। उनके अनुसार, वे जयपुर से पश्चिम बंगाल की ओर सरसों तेल से भरा ट्रक लेकर जा रहे थे।
दौसा के पास सैंथल पुलिया के नजदीक हाईवे पर अचानक जीप और बोलेरो में सवार 8-9 बदमाशों ने ट्रक को घेर लिया। बदमाशों ने जबरन ट्रक रुकवाया और ड्राइवर व खलासी के साथ मारपीट की। इसके बाद दोनों को बंधक बना लिया गया और ट्रक सहित उसमें भरा सरसों का तेल, नकदी और मोबाइल लूटकर फरार हो गए।
इस वारदात की खास बात यह थी कि बदमाशों ने पूरी प्लानिंग के साथ हाईवे पर ट्रक को रोका, जिससे यह मामला एक संगठित गैंग की गतिविधि जैसा प्रतीत हुआ।
घटना के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की, लेकिन आरोपी लगातार अपनी पहचान छिपाकर अलग-अलग राज्यों में घूमते रहे। पुलिस टीम ने जयपुर, भरतपुर, अलवर, दिल्ली और हरियाणा समेत कई स्थानों पर दबिश दी, लेकिन सफलता नहीं मिली।
आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी का मुख्य कारण उनका लगातार लोकेशन बदलना और फर्जी पहचान का इस्तेमाल करना था। इसके बावजूद पुलिस ने हार नहीं मानी और मामले को खुला रखा।
हाल ही में पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली, जिसके आधार पर साइबर सेल और कोतवाली थाना पुलिस ने अलवर में दबिश दी। करीब दो महीने की लगातार निगरानी और तकनीकी विश्लेषण के बाद आखिरकार दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
इस ऑपरेशन में साइबर सेल के कांस्टेबल दशरथ सिंह की भूमिका अहम रही। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों से पूछताछ के दौरान और भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की संभावना है।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गई है। माना जा रहा है कि इस वारदात में शामिल अन्य आरोपी अभी भी फरार हो सकते हैं। पुलिस उनसे जुड़े नेटवर्क, फाइनेंस और अन्य अपराधों की भी जांच कर रही है।
इसके अलावा यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि लूटा गया सरसों तेल कहां बेचा गया और इस पूरी वारदात में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
इस घटना ने एक बार फिर हाईवे सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस तरह से बदमाशों ने खुलेआम ट्रक को घेरकर लूट की वारदात को अंजाम दिया, वह दर्शाता है कि उस समय सुरक्षा व्यवस्था में कहीं न कहीं कमी थी।
हालांकि, पुलिस का कहना है कि वर्तमान में हाईवे पेट्रोलिंग और निगरानी व्यवस्था को पहले से अधिक मजबूत किया गया है, जिससे इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
7 साल बाद आरोपियों की गिरफ्तारी को पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठता है कि इतने लंबे समय तक आरोपी कानून से बचते कैसे रहे। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपराधी चाहे कितना भी चालाक क्यों न हो, कानून के हाथ से बच नहीं सकता।
दौसा का यह मामला दिखाता है कि अपराध भले ही कितना भी पुराना क्यों न हो, पुलिस की लगातार कोशिशें अंततः अपराधियों तक पहुंच ही जाती हैं। 50 लाख की लूट का यह केस अब अपने अंतिम चरण में पहुंच रहा है, लेकिन इससे जुड़े कई पहलू अभी भी सामने आना बाकी हैं।
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