अंतरिक्ष: इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण मिशनों में से एक Artemis II अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर Orion spacecraft ने अब चांद की ओर अपनी यात्रा शुरू कर दी है।
लॉन्च के लगभग एक दिन बाद यान ने ‘ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न’ नाम की महत्वपूर्ण प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस दौरान इंजन करीब 6 मिनट तक फायर किए गए, जिससे यान की रफ्तार अचानक बढ़कर लगभग 34,000 किलोमीटर प्रति घंटा हो गई। इसी के साथ यान ने पृथ्वी की कक्षा को छोड़कर चंद्रमा की दिशा पकड़ ली।
यह मिशन NASA के महत्वाकांक्षी आर्टेमिस प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य इंसानों को दोबारा चांद पर भेजना और भविष्य में मंगल ग्रह तक पहुंचने की तैयारी करना है।
इस समय यान ‘फ्री-रिटर्न ट्रेजैक्टरी’ पर है। इसका मतलब है कि अब यह मुख्य रूप से गति और गुरुत्वाकर्षण के नियमों के सहारे आगे बढ़ रहा है। Newton's First Law of Motion के अनुसार, कोई वस्तु तब तक चलती रहती है जब तक उस पर बाहरी बल न लगे—ठीक इसी सिद्धांत पर यह यान आगे बढ़ रहा है।
इस चरण में किसी भी तरह की बड़ी गलती बेहद खतरनाक हो सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि रास्ते में जरा सी भी दिशा या गति में चूक हुई, तो यान चंद्रमा से टकरा सकता है या फिर अंतरिक्ष में भटक सकता है।
यान में सवार अंतरिक्ष यात्री फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित बताए जा रहे हैं। उन्होंने अंतरिक्ष में जीरो ग्रेविटी के अनुभव को साझा करते हुए इसे बेहद रोमांचक बताया।
कमांडर रीड वाइसमैन ने अंतरिक्ष में सोने के अनुभव को “मजेदार” बताया, जबकि क्रिस्टीना कोच तकनीकी समस्याओं को ठीक करने में लगी हुई हैं। अंतरिक्ष से पृथ्वी का नजारा देखकर सभी यात्री भावुक हो गए—धरती उन्हें एक नीले चमकते गोले की तरह दिखाई दे रही है।
मिशन के पांचवें दिन यान चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में प्रवेश करेगा। जैसे ही यह चंद्रमा के प्रभाव में आएगा, इसकी गति फिर से बढ़ने लगेगी।
छठे दिन यह चंद्रमा की सतह से करीब 6,400 किलोमीटर ऊपर से गुजरेगा। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के उस हिस्से को देख सकेंगे, जो पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता।
इसी दौरान लगभग 50 मिनट का ‘कम्युनिकेशन ब्लैकआउट’ भी होगा, जब यान चंद्रमा के पीछे से गुजरेगा और पृथ्वी से उसका संपर्क पूरी तरह टूट जाएगा।
यह मिशन 1970 के Apollo 13 के रिकॉर्ड को भी तोड़ सकता है। उस समय अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से लगभग 4 लाख किलोमीटर दूर तक पहुंचे थे, जबकि आर्टेमिस-2 के यात्रियों के 4.02 लाख किलोमीटर तक पहुंचने की संभावना है।
सातवें दिन यान चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल ‘गुलेल’ की तरह करेगा, जिससे वह वापस पृथ्वी की ओर लौटने लगेगा। यह तकनीक ईंधन बचाने और सुरक्षित वापसी के लिए बेहद अहम मानी जाती है।
पूरे मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री करीब 11 लाख किलोमीटर की यात्रा पूरी करेंगे। मिशन के अंत में, 10 अप्रैल को यान पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा और प्रशांत महासागर में सुरक्षित लैंडिंग करेगा।
आर्टेमिस-2 मिशन मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के नए युग की शुरुआत है। हालांकि यह सफर बेहद जोखिम भरा है, लेकिन इसकी सफलता भविष्य में चांद और मंगल मिशनों के लिए नई राह खोलेगी।
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