लाहौर/इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक नई योजना को लेकर सियासी और सामाजिक बहस छिड़ गई है। मरियम नवाज के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार गाय और भैंस पालने वाले पशुपालकों पर एक नई फीस लगाने की तैयारी कर रही है। इस प्रस्तावित योजना को विपक्ष ने ‘गोबर टैक्स’ का नाम दिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार हर गाय और भैंस पर प्रतिदिन करीब 30 पाकिस्तानी रुपये का शुल्क वसूलने की योजना बना रही है। इस कदम को ‘सुथरा पंजाब’ बायोगैस प्रोग्राम के तहत लागू किया जाएगा, जिसका उद्देश्य कचरा प्रबंधन और ग्रीन एनर्जी उत्पादन को बढ़ावा देना बताया जा रहा है।
सरकार के अनुसार, यह योजना दिसंबर 2024 में शुरू किए गए ‘सुथरा पंजाब’ अभियान का हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य पशुओं से निकलने वाले गोबर को इकट्ठा कर उससे बायोगैस बनाना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।
इस योजना के तहत पंजाब प्रांत की लगभग 168 कैटल कॉलोनियों को चिन्हित किया गया है, जहां करीब 50 लाख गाय-भैंसों पर यह शुल्क लागू हो सकता है। पहले चरण में लाहौर की प्रमुख डेयरी कॉलोनियों—हरबंसपुरा और गुज्जरपुरा—से इसकी शुरुआत की जाएगी।
सरकार का तर्क है कि इतनी बड़ी संख्या में पशुओं से निकलने वाले गोबर को मापना मुश्किल है, इसलिए प्रति पशु तय शुल्क का मॉडल अपनाया गया है।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस शुल्क से मिलने वाले पैसे का उपयोग गोबर इकट्ठा करने, कचरा प्रबंधन और बायोगैस प्लांट संचालित करने में किया जाएगा। इससे न केवल स्वच्छता में सुधार होगा, बल्कि वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत भी विकसित होंगे।
स्थानीय सरकार मंत्री जीशान रफीक के अनुसार, कई डेयरी किसानों ने इस योजना के प्रति सहमति भी जताई है और इसे एक सेवा शुल्क के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि टैक्स के रूप में।
विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि यह योजना सिर्फ नाम के लिए ‘ग्रीन एनर्जी’ है, जबकि असल मकसद सरकार के लिए नया राजस्व जुटाना है।
विपक्ष का आरोप है कि पहले से ही आर्थिक संकट और महंगाई से जूझ रही जनता पर यह एक अतिरिक्त बोझ है। उन्होंने इसे ‘गोबर टैक्स’ करार देते हुए कहा कि यह दर्शाता है कि सरकार के पास आय के पारंपरिक स्रोत खत्म हो चुके हैं।
इस योजना को लेकर सबसे ज्यादा चिंता पशुपालकों और किसानों में देखी जा रही है। उनका कहना है कि वे पहले से ही महंगे चारे, बढ़ती बिजली दरों और महंगाई से परेशान हैं।
अगर यह शुल्क लागू होता है, तो सालभर में प्रति पशु करीब 11 हजार पाकिस्तानी रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा। इससे छोटे और मध्यम स्तर के डेयरी किसानों पर बड़ा आर्थिक दबाव पड़ सकता है।
एक स्थानीय उद्योग विशेषज्ञ ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “जहां एक तरफ अधिकारी और नेता विलासिता का जीवन जी रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ किसानों को अपने पशुओं के गोबर के लिए भी भुगतान करने को कहा जा रहा है।”
फिलहाल यह योजना शुरुआती चरण में है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी की जा रही है। लेकिन जिस तरह से विपक्ष और किसान संगठनों ने इसका विरोध किया है, उससे साफ है कि यह मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक रूप से और बड़ा रूप ले सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार इस योजना को पारदर्शी और लाभकारी तरीके से लागू नहीं कर पाई, तो यह जनविरोध का कारण बन सकती है।
पाकिस्तान में प्रस्तावित ‘गोबर टैक्स’ योजना एक तरफ पर्यावरण और ऊर्जा सुधार के नाम पर लाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर इसे आर्थिक दबाव का संकेत माना जा रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार इस योजना को कैसे लागू करती है और क्या यह वास्तव में ग्रीन एनर्जी की दिशा में प्रभावी कदम साबित होती है या नहीं।
All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.