गुजरात: राज्य चुनाव आयोग ने राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों का ऐलान कर दिया है, जिससे पूरे प्रदेश में चुनावी माहौल गर्म हो गया है। इन चुनावों को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले का “सेमीफाइनल” माना जा रहा है, जहां सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी ताकत झोंकने के लिए तैयार हैं।
घोषणा के अनुसार, राज्य की 15 महानगरपालिकाओं, 84 नगरपालिकाओं, 34 जिला पंचायतों और 260 तालुका पंचायतों में 26 अप्रैल को मतदान होगा। वोटों की गिनती 28 अप्रैल को की जाएगी।
चुनाव की घोषणा के साथ ही राज्य में आचार संहिता लागू हो गई है।
इस बार कुल 10,005 सीटों पर चुनाव होंगे, जिन पर करीब 4.18 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
खास बात यह है कि हाल ही में गठित 8 नई महानगरपालिकाएं भी इस चुनाव में पहली बार हिस्सा लेंगी। इनमें आणंद-करमसद, गांधीधाम, महेसाणा, मोरबी, नडियाद, नवसारी, पोरबंदर, सुरेंद्रनगर और वापी जैसे शहर शामिल हैं।
गांधीनगर और जूनागढ़ में महानगरपालिका का कार्यकाल अभी जारी होने के कारण वहां चुनाव नहीं होंगे। इसके अलावा 11 नगरपालिकाओं की खाली सीटों पर उपचुनाव भी साथ-साथ कराए जाएंगे।
नामांकन प्रक्रिया 6 से 11 अप्रैल तक चलेगी और मतदान का समय सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक निर्धारित किया गया है।
गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में एक दिलचस्प ट्रेंड देखने को मिलता है—हर पांच में से एक उम्मीदवार राजनीतिक परिवार से होता है।
हालांकि आंकड़े बताते हैं कि ऐसे उम्मीदवारों में से केवल 40-50% ही जीत पाते हैं। बाकी सीटों पर जमीनी स्तर के कार्यकर्ता और नए चेहरे कड़ी टक्कर देते हैं।
इस बार का चुनाव स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के बाद हो रहा है, जिसमें करीब 68 लाख मतदाता सूची से बाहर हो गए थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर चुनावी नतीजों पर साफ दिखाई दे सकता है, खासकर करीबी मुकाबलों में जीत-हार का अंतर कम हो सकता है।
इस चुनाव में OBC आरक्षण का नया रोटेशन भी बड़ा फैक्टर होगा। कुल 10 हजार सीटों में से 2286 सीटें OBC वर्ग के लिए आरक्षित हैं।
इसके अलावा लगभग 5 हजार सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जिससे चुनाव में महिला प्रतिनिधित्व भी बढ़ेगा।
शहरी क्षेत्रों में सड़क, सफाई, पानी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। वहीं ग्रामीण इलाकों में खेती, पानी और रोजगार बड़े चुनावी मुद्दे बनेंगे।
इस आधार पर राजनीतिक दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं।
राजनीतिक दृष्टि से यह चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाला है। भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस पार्टी और आम आदमी पार्टी के बीच मुकाबला देखने को मिल सकता है।
पिछले चुनावों में आम आदमी पार्टी ने खासकर सूरत जैसे क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन किया था। इस बार भी विपक्षी वोटों के बंटवारे का सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है।
इन चुनावों को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले का सेमीफाइनल माना जा रहा है।
पिछले रुझानों के अनुसार, स्थानीय निकाय चुनावों में जिस पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहता है, उसे विधानसभा चुनाव में भी फायदा मिलता है। ऐसे में सभी पार्टियां इस चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही हैं।
गुजरात के स्थानीय निकाय चुनाव केवल नगर और पंचायत स्तर के चुनाव नहीं हैं, बल्कि ये राज्य की राजनीति की दिशा तय करने वाले अहम संकेतक हैं।
OBC आरक्षण, SIR का असर, और त्रिकोणीय मुकाबले के बीच यह चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला है। 26 अप्रैल को होने वाली वोटिंग और 28 अप्रैल को आने वाले नतीजे राज्य की राजनीतिक तस्वीर को काफी हद तक साफ कर देंगे।
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