राजस्थान: की राजधानी Jaipur से एक बड़े साइबर घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसने देशभर के व्यापारिक जगत को चौंका दिया है। जयपुर पुलिस ने करीब 400 करोड़ रुपए के डिजिटल फ्रॉड का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह घोटाला देशभर की 400 से अधिक कंपनियों के डायरेक्टर्स के फर्जी डिजिटल सिग्नेचर बनाकर अंजाम दिया गया।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने बेहद सुनियोजित तरीके से Directorate General of Foreign Trade (DGFT) के पोर्टल को निशाना बनाया। सबसे पहले उन्होंने फर्जी आधार और पैन कार्ड के जरिए डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) तैयार करवाए। इसके बाद इन सिग्नेचर्स का उपयोग करके कंपनियों के डायरेक्टर्स की प्रोफाइल को DGFT पोर्टल पर बदल दिया।
जयपुर पुलिस कमिश्नर Sachin Mittal के अनुसार, आरोपियों ने 400 से अधिक फर्जी डिजिटल सिग्नेचर तैयार किए थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि एक डिजिटल सिग्नेचर के जरिए करीब 93 लाख रुपए का फ्रॉड किया गया। यदि औसतन एक खाते से 1 करोड़ रुपए की ठगी मानी जाए, तो कुल घोटाला 400 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।
इस गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद चौंकाने वाली थी। आरोपी पहले DGFT पोर्टल पर लॉगिन कर कंपनियों की ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर बदल देते थे। इसके बाद वे इंडियन कस्टम के ICEGATE पोर्टल पर नई आईडी बनाते और निर्यातकों को मिलने वाले सरकारी इंसेंटिव को अपने फर्जी खातों में ट्रांसफर कर लेते थे।
ये इंसेंटिव RODTEP (Remission of Duties and Taxes on Exported Products) और ROSCTL (Rebate of State and Central Taxes and Levies) जैसी योजनाओं के तहत दिए जाते हैं। सरकार निर्यातकों को टैक्स और ड्यूटी में राहत देने के लिए ई-स्क्रिप्स जारी करती है। आरोपी इन्हीं स्क्रिप्स को चुराकर म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर करते और बाद में उन्हें बेचकर रकम निकाल लेते थे।
इस पूरे ऑपरेशन में अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी सामने आया है। पुलिस जांच में पता चला कि फर्जी डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट दुबई से डाउनलोड किए जाते थे। वहीं, दिल्ली में सक्रिय एजेंट इन स्क्रिप्स को बेचने का काम करते थे। इस तरह यह गिरोह देश और विदेश दोनों जगह से ऑपरेट कर रहा था।
जयपुर पुलिस की साइबर टीम ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें सुल्तान खान, नंदकिशोर, अशोक कुमार भंडारी, प्रमोद खत्री (जोधपुर निवासी) और निर्मल सोनी (पाली निवासी) शामिल हैं। इनमें से चार आरोपी फर्जी डिजिटल सिग्नेचर तैयार करने में माहिर बताए जा रहे हैं।
स्पेशल पुलिस कमिश्नर Om Prakash ने बताया कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने में भी बड़ी चालाकी दिखाई। कई मामलों में महिला के नाम पर बनाए गए दस्तावेजों में पुरुष की फोटो लगाई गई थी, ताकि पहचान छिपाई जा सके।
एक पीड़ित के अनुसार, शुरुआती चरण में उसके खाते से करीब 17.88 लाख रुपए की स्क्रिप्स ट्रांसफर की गई थीं, जो बाद में बढ़कर 93 लाख रुपए तक पहुंच गई। यह दर्शाता है कि आरोपी धीरे-धीरे बड़े स्तर पर ठगी को अंजाम दे रहे थे।
पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह में 13 से 15 लोगों के शामिल होने की आशंका है। फिलहाल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है और इस पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए विभिन्न राज्यों में छापेमारी की जा रही है।
यह मामला डिजिटल सुरक्षा और सरकारी पोर्टलों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के घोटालों को रोकने के लिए साइबर सिक्योरिटी को और मजबूत करने की जरूरत है।
जयपुर का यह साइबर घोटाला दिखाता है कि तकनीक का गलत इस्तेमाल कितना खतरनाक हो सकता है। समय रहते पुलिस की कार्रवाई से बड़ा नेटवर्क उजागर हुआ है, लेकिन इससे साइबर सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की जरूरत और बढ़ गई है।
All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.