‘बार-बार गुलामी की असली वजह क्या?’ भागवत का बड़ा बयान—हिंदू समाज की एकता पर उठाए गंभीर सवाल

निजामाबाद: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को तेलंगाना के निजामाबाद जिले में एक कार्यक्रम के दौरान हिंदू समाज की एकता को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि समाज में एकता की कमी ही इतिहास में बार-बार गुलामी का सबसे बड़ा कारण रही है।

भागवत कंडाकुर्थी गांव में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे, जहां उन्होंने केशव बलिराम हेडगेवार की विचारधारा और RSS की स्थापना के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। यह गांव हेडगेवार का पैतृक स्थान माना जाता है और यहां ‘श्री केशव स्फूर्ति मंदिर’ का उद्घाटन भी किया गया।

‘एकता की कमी ने देश को कमजोर किया’

अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि हेडगेवार का मानना था कि भारत को बार-बार गुलामी का सामना इसलिए करना पड़ा क्योंकि समाज के भीतर एकता की कमी थी। उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रमणकारी तो बाद में आए, लेकिन समाज की आंतरिक कमजोरियों ने उन्हें सफल होने का मौका दिया।

भागवत ने कहा, “हममें कुछ ऐसी कमियां थीं, जिनकी वजह से हम एकजुट नहीं रह पाए और बाहरी ताकतों ने इसका फायदा उठाया।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज को मजबूत बनाने के लिए सबसे पहले आंतरिक एकता जरूरी है।

RSS की स्थापना का उद्देश्य बताया

RSS प्रमुख ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज को संगठित और मजबूत बनाने के लिए की गई थी। उन्होंने बताया कि हेडगेवार का उद्देश्य हिंदू समाज को निडर, अनुशासित और जागरूक बनाना था, ताकि देश को फिर कभी गुलामी का सामना न करना पड़े।

उन्होंने कहा कि हेडगेवार ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कई रास्तों पर काम किया, जिनमें राजनीतिक और सशस्त्र विरोध भी शामिल था। लेकिन अंततः उन्होंने यह समझा कि स्थायी समाधान समाज की एकता में ही है।

हिंदुत्व की परिभाषा पर जोर

भागवत ने हिंदुत्व को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व का अर्थ केवल धार्मिक पहचान नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है। इसमें दूसरों के साथ मिलकर रहना, अपने रास्ते पर चलना और सभी का सम्मान करना शामिल है।

उन्होंने कहा कि RSS की शाखाओं में इसी तरह के संस्कार दिए जाते हैं, जिससे समाज में सकारात्मक सोच और सामंजस्य बढ़ता है।

‘समाज की कमजोरी को दूर करना जरूरी’

भागवत ने कहा कि अगर समाज अपनी कमजोरियों को दूर नहीं करता, तो भविष्य में भी चुनौतियां बनी रहेंगी। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे एकजुट होकर समाज को मजबूत बनाएं और राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।

उन्होंने यह भी कहा कि कंडाकुर्थी में बना ‘स्फूर्ति केंद्र’ लोगों को निस्वार्थ भाव से काम करने और समाज सेवा के लिए प्रेरित करेगा।

भागवत के हालिया बयान भी चर्चा में

हाल के महीनों में मोहन भागवत के कई बयान चर्चा में रहे हैं। इससे पहले उन्होंने नागपुर में RSS के काम के विस्तार को लेकर संगठन में विकेंद्रीकरण की बात कही थी।

इसके अलावा मुंबई में उन्होंने यह भी कहा था कि अगर संगठन उनसे पद छोड़ने को कहेगा, तो वे तुरंत ऐसा करेंगे। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि RSS में किसी पद के लिए जाति या वर्ग नहीं, बल्कि समर्पण और कार्य महत्वपूर्ण होता है।

राजनीतिक और सामाजिक असर

भागवत के इस बयान को राजनीतिक और सामाजिक दोनों नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जहां एक ओर उन्होंने इतिहास के संदर्भ में समाज की कमजोरियों की बात की, वहीं दूसरी ओर वर्तमान समय में एकता और संगठन की जरूरत पर जोर दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान सामाजिक विमर्श को दिशा देते हैं और आने वाले समय में इस पर व्यापक चर्चा हो सकती है।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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