अंबेडकर पोस्टर जलाने से भड़का वाराणसी: सड़क जाम, पथराव में ACP घायल, 300 पुलिसकर्मी तैनात

वाराणसी: में अंबेडकर जयंती से जुड़े विवाद ने शुक्रवार को हिंसक रूप ले लिया। भीमराव अंबेडकर के पोस्टर और झंडे जलाने की घटना के बाद दलित समाज के लोगों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया, जो देखते ही देखते सड़क जाम और पथराव में बदल गया।

घटना चोलापुर थाना क्षेत्र के नेहिया गांव की है, जहां अंबेडकर जयंती के मौके पर लगाए गए झंडे और पोस्टरों को कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा फाड़कर जला दिया गया। इस घटना से नाराज होकर स्थानीय लोगों ने बाबतपुर-चौबेपुर मार्ग पर चक्का जाम कर दिया और पुलिस के खिलाफ भी आक्रोश जताया।

प्रदर्शन ने लिया हिंसक रूप

प्रदर्शन के दौरान हालात तब बिगड़ गए जब भीड़ ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान विदुष सक्सेना, जो सारनाथ क्षेत्र की ACP हैं, गंभीर रूप से घायल हो गईं। उनके सिर में चोट आई है। इसके अलावा चोलापुर थाने के दो दरोगा भी घायल बताए जा रहे हैं।

घटना के बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया और भीड़ को तितर-बितर किया। हालांकि, गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

क्या है पूरा विवाद?

जानकारी के अनुसार, अंबेडकर जयंती के दिन दलित समाज के लोगों ने गांव में झंडे और पोस्टर लगाए थे। आरोप है कि दूसरे पक्ष के कुछ लोगों ने इन्हें हटाकर जला दिया। इसको लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे हिंसा में बदल गया।

दलित समाज के लोगों का आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की, बल्कि दूसरे पक्ष की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली। इसी के विरोध में लोगों ने सड़क जाम और प्रदर्शन किया।

पुलिस का एक्शन और तैनाती

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आया। प्रमोद कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और हालात को संभाला।

पुलिस ने गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में बल तैनात किया है। जानकारी के मुताबिक, 4 आईपीएस अधिकारी, 2 एसीपी और करीब 300 पुलिसकर्मी इलाके में मौजूद हैं। संवेदनशीलता को देखते हुए गांव में लगातार निगरानी की जा रही है।

प्रशासन का बयान

डीसीपी वरुणा जोन प्रमोद कुमार ने बताया कि पुलिस को चक्का जाम और धरने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया गया। उन्होंने कहा कि अराजक तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

घायलों का इलाज कराया जा रहा है और इलाके में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।

सामाजिक तनाव की वजह

यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि संवेदनशील मुद्दों पर छोटी सी चिंगारी भी बड़े विवाद का रूप ले सकती है। अंबेडकर जयंती जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर इस तरह की घटना से सामाजिक सौहार्द प्रभावित हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में प्रशासन की त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई बेहद जरूरी होती है, ताकि स्थिति बिगड़ने से पहले ही उसे नियंत्रित किया जा सके।

आगे की कार्रवाई

पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है। सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय लोगों से पूछताछ के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है। जल्द ही दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।


निष्कर्ष:

वाराणसी में अंबेडकर पोस्टर विवाद से भड़की हिंसा ने कानून व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। हालांकि पुलिस ने समय रहते हालात को काबू में कर लिया, लेकिन इस घटना ने सामाजिक संवेदनशीलता और प्रशासनिक सतर्कता की अहमियत को एक बार फिर उजागर कर दिया।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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