राजस्थान: में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसने देश की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) ने हनुमानगढ़ जिले में फर्जी बायोमेट्रिक्स के जरिए आधार कार्ड बनाने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि कई चौंकाने वाले उपकरण और दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
ATS की टीम ने भादरा कस्बे में नगर पालिका के पास चल रहे एक अवैध आधार कार्ड सेंटर पर छापा मारा। यह सेंटर पूरी तरह गैरकानूनी तरीके से संचालित हो रहा था और इसमें दूसरों की आईडी का इस्तेमाल किया जा रहा था।
कार्रवाई के दौरान आरोपी कुलदीप शर्मा को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। ATS अधिकारियों के मुताबिक, कुलदीप इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड है और लंबे समय से इस अवैध गतिविधि को चला रहा था।
छापेमारी के दौरान जो चीजें सामने आईं, उन्होंने जांच एजेंसियों को भी हैरान कर दिया। आरोपी नकली अंगूठे (डमी फिंगरप्रिंट) और रेटिना की फोटो कॉपी का इस्तेमाल कर बायोमेट्रिक सिस्टम को धोखा देता था।
लाल और सफेद रंग के रबर से बने नकली फिंगरप्रिंट तैयार किए गए थे, जिनसे सिस्टम में लॉगिन किया जाता था। वहीं, आंखों की रेटिना की फोटो को आईरिस स्कैनर के सामने रखकर असली पहचान की तरह दिखाया जाता था।
यह तकनीक इतनी चालाकी से इस्तेमाल की जा रही थी कि पहली नजर में यह पूरी तरह वैध प्रक्रिया लगती थी।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी जसवंत और आमिर खान नाम के ऑपरेटरों की आईडी का अवैध रूप से इस्तेमाल कर रहा था। इतना ही नहीं, वह खुद ही उनके नाम से फर्जी हस्ताक्षर कर एनरोलमेंट प्रक्रिया पूरी करता था।
मौके से सैकड़ों एनरोलमेंट रसीदें भी बरामद हुई हैं, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह गिरोह बड़े पैमाने पर फर्जी आधार कार्ड बना चुका है।
ATS ने छापेमारी के दौरान कई हाईटेक उपकरण जब्त किए हैं, जिनमें लैपटॉप, प्रिंटर, आईरिस स्कैनर, पाम फिंगरप्रिंट डिवाइस, GPS डिवाइस, कैमरा और फिंगरप्रिंट डाई शामिल हैं।
इन उपकरणों की मदद से यह गिरोह पूरी तरह संगठित तरीके से काम कर रहा था और सरकारी सिस्टम की खामियों का फायदा उठा रहा था।
ATS अधिकारियों के अनुसार, इस तरह से बनाए गए फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल कई गंभीर अपराधों में किया जा सकता है। इनमें फर्जी सिम कार्ड लेना, बैंक खाते खोलना, साइबर क्राइम करना और यहां तक कि राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को अंजाम देना भी शामिल है।
यही कारण है कि इस मामले को बेहद संवेदनशील मानते हुए इसकी जांच गहराई से की जा रही है।
गिरफ्तार आरोपी कुलदीप शर्मा से ATS और पुलिस की संयुक्त टीम लगातार पूछताछ कर रही है। प्रारंभिक जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस रैकेट से कितने लोगों ने फर्जी आधार कार्ड बनवाए।
साथ ही यह भी जांच हो रही है कि क्या इस गिरोह के तार किसी अंतरराज्यीय नेटवर्क या बड़े साइबर अपराध सिंडिकेट से जुड़े हुए हैं।
पुलिस ने आरोपी का मोबाइल और लैपटॉप जब्त कर लिया है, जिनका फोरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है। उम्मीद है कि इससे इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और ग्राहकों की पहचान हो सकेगी।
हनुमानगढ़ में सामने आया यह फर्जी आधार कार्ड रैकेट सिर्फ एक स्थानीय अपराध नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे का संकेत है। इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि तकनीक का दुरुपयोग कितना खतरनाक हो सकता है। अब जरूरी है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई के साथ-साथ सिस्टम को और मजबूत बनाया जाए।
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